श्रीनगर बनेगा हाॅर्न फ्री व नो ओवरटेकिंग जोन-महापौर आरती भण्डारी की पहल से शुरू हुआ अनुशासन का अभियान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की शांत वादियों में जब अनावश्यक हॉर्न की कर्कश ध्वनि गूंजती है तो वह केवल शोर नहीं,बल्कि नागरिक जीवन की लय को भी बाधित करती है।

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की शांत वादियों में जब अनावश्यक हॉर्न की कर्कश ध्वनि गूंजती है तो वह केवल शोर नहीं,बल्कि नागरिक जीवन की लय को भी बाधित करती है। अब इस स्थिति को बदलने की ठोस पहल नगर निगम श्रीनगर ने शुरू कर दी है। शहर को चरणबद्ध तरीके से हॉर्न फ्री जोन और नो ओवरटेकिंग जोन बनाने की दिशा में शुक्रवार को नगर निगम सभागार में महापौर आरती भण्डारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसमें व्यापक सहमति के साथ ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। पंचपीपल से स्वीत पुल तक बनेगा हॉर्न फ्री कॉरिडोर बैठक में तय किया गया कि प्रथम चरण में पंचपीपल से स्वीत पुल तक के क्षेत्र को हॉर्न फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इस कॉरिडोर में प्रेशर हॉर्न के प्रयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। केवल परिवहन विभाग द्वारा स्वीकृत मानक हॉर्न का ही उपयोग किया जा सकेगा। अनावश्यक ओवरटेकिंग पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। प्रमुख स्थानों पर हॉर्न फ्री जोन के सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। नगर निगम का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जाएगा। बैठक में यह गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि शहर में प्रेशर हॉर्न का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। विशेषकर विद्यालयों के आसपास अध्ययनरत विद्यार्थियों,अस्पतालों में भर्ती मरीजों और वरिष्ठ नागरिकों को तेज ध्वनि से अत्यधिक असुविधा होती है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी लगातार ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव,अनिद्रा,चिड़चिड़ापन और रक्तचाप जैसी समस्याओं को बढ़ाता है। ऐसे में यह पहल केवल यातायात सुधार तक सीमित नहीं,बल्कि जनस्वास्थ्य से भी जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। नेतृत्व से शुरू हुआ बदलाव इस अभियान की सबसे प्रेरक बात यह रही कि महापौर आरती भंडारी ने स्वयं उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी में लगभग 15 दिन पूर्व ही हॉर्न का प्रयोग बंद कर दिया। बताया गया कि बीते पंद्रह दिनों से उनकी गाड़ी बिना हॉर्न के ही संचालित हो रही है। यह संदेश स्पष्ट है,नियम केवल आम जनता के लिए नहीं,बल्कि जनप्रतिनिधियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं। बदलाव की शुरुआत नेतृत्व से ही होनी चाहिए। बैठक में पार्षदगण,जीएमओयू एवं टीजीएमओयू के प्रबंधक,टैक्सी यूनियन,जय बद्री-केदार टाटा सूमो यूनियन,अलकनंदा कमांडर यूनियन समिति के प्रतिनिधि तथा नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शहर को शांत,व्यवस्थित और अनुशासित बनाने के इस प्रयास का समर्थन किया और पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आदर्श शहर की ओर कदम महापौर आरती भण्डारी ने कहा श्रीनगर को शांत,सुरक्षित और अनुशासित शहर बनाना हमारा लक्ष्य है। अनावश्यक हॉर्न केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं बढ़ाता,बल्कि समाज के संवेदनशील वर्गों के लिए परेशानी का कारण भी बनता है। मैंने स्वयं अपनी गाड़ी में हॉर्न बंद कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए। नगर निगम,परिवहन यूनियनों और शहरवासियों के सहयोग से हम निश्चित रूप से श्रीनगर को हॉर्न फ्री और नो ओवरटेकिंग जोन के रूप में स्थापित करेंगे। नगर निगम की यह पहल शहर में सकारात्मक चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि यह अभियान सफल होता है तो श्रीनगर न केवल उत्तराखंड,बल्कि अन्य नगर निकायों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। शांत शहर,सुरक्षित यातायात और अनुशासित नागरिक,यही है नए श्रीनगर की परिकल्पना।

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