
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में बाल संरक्षण को लेकर प्रशासन की संवेदनशीलता एक बार फिर सामने आई है। पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज एक प्रकरण में पीड़ित बालिका के समुचित पुनर्वास और पोषण को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने मानवीय पहल करते हुए उसे तीन माह का पुष्टाहार उपलब्ध कराया है। यह सहायता जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देशन तथा जिला परिवीक्षा अधिकारी अरविंद कुमार के नेतृत्व में प्रदान की गई। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि बाल संरक्षण केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं,बल्कि पीड़ित बच्चों के समग्र विकास और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को मिला संबल जिला परिवीक्षा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि संबंधित बालिका विकासखंड थलीसैंण की निवासी है और उसका परिवार आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति में जीवनयापन कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में बालिका के शारीरिक स्वास्थ्य,मानसिक संतुलन और पोषण की निरंतरता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता रही। तीन माह का पुष्टाहार उपलब्ध कराते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि बालिका के विकास में किसी प्रकार की कमी न आए और उसे सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। जिला परिवीक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभाग की भूमिका केवल एफआईआर या न्यायालयीन कार्यवाही तक सीमित नहीं है। पीड़ित बालिकाओं के पुनर्वास,परामर्श,सामाजिक सुरक्षा,शिक्षा और पोषण को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बालिका एवं उसके परिवार को भविष्य में विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ते हुए निरंतर सहयोग प्रदान किया जाएगा,ताकि परिवार आत्मनिर्भर बन सके और बालिका का भविष्य सुरक्षित रहे। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम भी उपस्थित रही। सपोर्ट पर्सन मालती देवी द्वारा परिवार से समन्वय स्थापित कर सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। प्रशासन की इस पहल से यह स्पष्ट हुआ है कि जनपद में बाल संरक्षण तंत्र न केवल सक्रिय है,बल्कि संवेदनशील और उत्तरदायी भी है। यह कदम केवल एक सहायता भर नहीं,बल्कि समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि पीड़ित बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित सहयोग की यह पहल जनपद में बाल अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।