शहीदों के सपनों को साकार करने का संकल्प-शिक्षा और पर्यावरण बचाने को देहरादून में एआईडीएसओ का ऐतिहासिक विद्यार्थी सम्मेलन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल/आज 23 मार्च को शहीदे-आजम भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर एआईडीएसओ द्वारा देहरादून में उत्तराखंड राज्य का पहला विद्यार्थी सम्मेलन भव्य रूप से

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल/आज 23 मार्च को शहीदे-आजम भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के अवसर पर एआईडीएसओ द्वारा देहरादून में उत्तराखंड राज्य का पहला विद्यार्थी सम्मेलन भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन ने शिक्षा और पर्यावरण जैसे ज्वलंत मुद्दों को केंद्र में रखकर एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास किया। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई,जिसके पश्चात शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे सम्मेलन के दौरान युवाओं में जोश,प्रतिबद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरी संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से देखने को मिली। सम्मेलन के प्रथम सत्र में पर्यावरणविद् डॉ.रवि चोपड़ा ने प्रदेश की पर्यावरणीय चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जल,जंगल और जमीन पर कॉर्पोरेट घरानों का बढ़ता कब्जा और प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन आम जनजीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते इन संसाधनों की रक्षा के लिए व्यापक जन-एकजुटता नहीं बनी तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं शिक्षा के मुद्दे पर अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मंडल शिव प्रसाद सेमवाल ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण,सांप्रदायीकरण और व्यापारीकरण को इसके प्रमुख कारण बताते हुए इनके खिलाफ संगठित आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया। एआईडीएसओ सेंट्रल काउंसिल की जॉइंट सेक्रेटरी श्रुति शिवहरे ने अपने संबोधन में भगत सिंह और ज्योतिबा फुले के विचारों को युवाओं के सामने रखते हुए नई शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) के संभावित दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने की नीतियों का विरोध करते हुए शिक्षा को जनसुलभ बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई। सम्मेलन में शिक्षा और पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाने,शिक्षा के निजीकरण,व्यापारीकरण और सांप्रदायिकरण को समाप्त करने तथा जनहित में ठोस नीतियां लागू करने की मांग प्रमुख रही। द्वितीय सत्र में संगठनात्मक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एआईडीएसओ की पहली राज्य कमेटी का गठन किया गया। 21 सदस्यीय इस कमेटी में कुलदीप को अध्यक्ष,मोनिका चौहान को उपाध्यक्ष,रंजना को सचिव,अजय को कोषाध्यक्ष तथा हिमानी को ऑफिस सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी गई। सम्मेलन की अध्यक्षता रेशमा पंवार ने की। इस अवसर पर बंगाल के पूर्व सांसद डॉ.तरुण मंडल,एआईडीएसओ केंद्रीय परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ.मुकेश सेमवाल,ऑफिस सेक्रेटरी प्रशांत कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं,बुद्धिजीवी और शहर के नागरिक उपस्थित रहे। सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि शिक्षा और पर्यावरण को बचाना है,तो युवाओं को आगे आकर संगठित संघर्ष करना होगा-यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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