
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर गढ़वाल में संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई छेड़छाड़ और अपमानजनक कृत्य ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर सामाजिक संगठन स्कूल ऑफ थॉट्स ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे न केवल एक महापुरुष का अपमान,बल्कि समाज की संवेदनाओं पर सीधा आघात बताया है। घटना के विरोध में स्कूल ऑफ थॉट्स श्रीनगर की एक आपात बैठक आयोजित की गई,जिसमें वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक सौहार्द और सम्मान की भावना को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कृत्यों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बैठक में यह भी सवाल उठाया गया कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितनी गंभीरता बरत रहा है। वक्ताओं ने मांग की कि संबंधित पार्क में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। संगठन के सदस्यों ने प्रशासन से मांग की कि इस कृत्य में शामिल असामाजिक तत्वों की शीघ्र पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो इस प्रकार की घटनाएं बढ़ सकती हैं,जो समाज के लिए घातक साबित होंगी। बैठक में इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने के लिए विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के साथ जल्द ही गहन विचार-विमर्श करने पर भी सहमति बनी। वक्ताओं ने संकेत दिए कि यदि प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है,तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। बैठक में संगठन के संयोजक डॉ.प्रदीप अंथवाल,डॉ.अरुण कुकसाल,गजेन्द्र दानू,सीताराम बहुगुणा,डॉ.योगेंद्र कांडपाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंबेडकर प्रतिमा के साथ हुई यह घटना अब एक बड़े जन मुद्दे का रूप लेती जा रही है। समाज के विभिन्न वर्गों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से न्याय सुनिश्चित किया जाता है।