
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर शहर में लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या को लेकर अब नगर निगम पूरी तरह सक्रिय मोड में नजर आ रहा है। आम जनता की परेशानी और आगामी पर्यटन सीजन के बढ़ते दबाव को देखते हुए नगर निगम ने जल संस्थान के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर जल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने का रोडमैप तैयार किया है। महापौर आरती भण्डारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में साफ शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शहर के सभी वार्डों में पेयजल आपूर्ति नियमित और निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए,ताकि किसी भी नागरिक को पानी के लिए जूझना न पड़े। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जल वितरण प्रणाली में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जाएगा,आपूर्ति के समय को व्यवस्थित और जरूरत अनुसार बढ़ाया जाएगा,संवेदनशील और पानी की कमी वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। मेयर ने अधिकारियों से कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं,बल्कि जनजीवन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण विषय है,इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पर्यटन सीजन को देखते हुए होटलों पर विशेष ध्यान श्रीनगर जो कि चारधाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव है,वहां पर्यटन सीजन के दौरान होटलों में पानी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है होटलों में पानी की आपूर्ति का समय बढ़ाया जाएगा,जल संस्थान और होटल एसोसिएशन के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा,पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो,इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। मेयर आरती भण्डारी ने कहा पर्यटन हमारे शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि पानी जैसी मूलभूत सुविधा में कमी रही,तो इसका सीधा असर शहर की छवि पर पड़ेगा। बैठक में मौजूद जल संस्थान के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए। आपूर्ति व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो भविष्य में संकट की स्थिति न बने,इसके लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए। इस अहम बैठक में सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी,मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार,पार्षदगण राजेंद्र नेगी,विजय चमोली,आशीष नेगी,होटल एसोसिएशन अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी,व्यापार सभा महासचिव अमित बिष्ट सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वहीं जल संस्थान की ओर से सहायक अभियंता अर्पित मित्तल और उनकी टीम ने भी भागीदारी निभाई। नगर निगम की यह पहल केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं,बल्कि जनहित और पर्यटन हित के बीच संतुलन साधने की रणनीति है। यदि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होता है,तो आने वाले समय में श्रीनगर न सिर्फ पेयजल संकट से उबर सकेगा,बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक बेहतर और सुविधाजनक शहर बनकर उभरेगा।