
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल में एक गंभीर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। अस्पताल में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्रता तथा एक महिला कर्मचारी को अपमानजनक धमकी देने के आरोप में जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ आक्रोश फूट पड़ा है। घटना के विरोध में स्वास्थ्य कर्मियों ने काला रिबन बांधकर कार्य करते हुए अपनी नाराजगी जताई और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 19 मार्च को तेंदुए के हमले में घायल एक बच्चे को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल लाया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अस्पताल पहुंचे। इसी बीच कर्मचारियों का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य पूनम कैंतुरा ने ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। कर्मचारियों के अनुसार विवाद के दौरान संबंधित जनप्रतिनिधि ने मर्यादाओं को लांघते हुए एक महिला कर्मचारी को बेहद आपत्तिजनक शब्द कहे और उसे अपमानित करने की धमकी दी। इस घटना से आहत कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वे अपने परिवारों से दूर रहकर 24 घंटे जनसेवा में जुटे रहते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यदि उन्हें इस प्रकार की अभद्रता और धमकियों का सामना करना पड़े,तो यह न केवल उनके मनोबल को तोड़ता है,बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्याओं को उठाने का पूरा अधिकार है,लेकिन इसके साथ भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। कर्मियों ने काला रिबन बांधकर अपनी ड्यूटी जारी रखी,जिससे यह संदेश दिया गया कि वे अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं,लेकिन अपमानजनक व्यवहार को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी,कर्मचारियों ने इस प्रकरण को लेकर शासन-प्रशासन से तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अपने कर्मचारी संगठनों को ज्ञापन सौंपकर भी उचित कदम उठाने की अपील की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई,तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। यह घटना न केवल स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल खड़े करती है,बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों के बीच संवाद और व्यवहार की मर्यादा कितनी महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती हैं।