नवरात्र महापर्व पर कंसमदनी मंदिर में उमड़ी आस्था की गंगा,मातृशक्ति ने भव्य शक्ति पूजन,भजन-कीर्तन एवं देवी जागर से रचा आध्यात्मिक वातावरण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर श्रीनगर स्थित कंस मदनी मंदिर में श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य संगम देखने को मिला। मातृशक्ति महिला मोर्चा के तत्वावधान

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर श्रीनगर स्थित कंस मदनी मंदिर में श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य संगम देखने को मिला। मातृशक्ति महिला मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित शक्ति पूजन,भजन-कीर्तन एवं देवी जागर कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मातृशक्ति ने पारंपरिक वेशभूषा में विधि-विधान के साथ मां भगवती का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भजन-कीर्तन और जागर की मधुर ध्वनियों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया,मानो स्वयं देवी शक्ति का साक्षात आशीर्वाद वहां उपस्थित हो। ढोल-दमाऊं की थाप और लोकधुनों पर आधारित देवी गीतों ने सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर प्रदेश के माननीय कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने भी कार्यक्रम में सहभागिता कर मां भगवती के चरणों में शीश नवाया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नवरात्र केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण,सामाजिक समरसता और नारी शक्ति के सम्मान का महापर्व है। उन्होंने मातृशक्ति की सक्रिय भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। कार्यक्रम में महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रमिला भंडारी के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। मंडल अध्यक्ष ललित नेगी सहित मुन्नी पांडे,निर्मला राणा,अनीता रावत,शांति भट्ट,आशा उपाध्याय,आशापुरा राशि,गुड्डी गैरोला,सरिता भंडारी समेत अनेक महिलाओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। नवरात्र का पर्व शक्ति साधना का प्रतीक है,जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना कर मन,बुद्धि और आत्मा को शुद्ध किया जाता है। कंस मदनी मंदिर में आयोजित यह जागर और पूजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना,बल्कि यह आंतरिक शक्ति,सकारात्मक ऊर्जा और श्रद्धा के जागरण का माध्यम भी बना। इस आयोजन ने यह भी संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर अपनी संस्कृति और आस्था के लिए आगे आता है,तो वह न केवल धार्मिक रूप से समृद्ध होता है,बल्कि सामाजिक रूप से भी मजबूत बनता है। मातृशक्ति की अगुवाई में हुआ यह आयोजन नारी सशक्तिकरण,सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा। जहां नारी का सम्मान होता है,वहीं देवत्व का वास होता है। मातृशक्ति केवल परिवार की आधारशिला नहीं,बल्कि समाज और संस्कृति की सबसे सशक्त संरक्षक होती है। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण के साथ आयोजन का समापन हुआ,लेकिन भक्ति और श्रद्धा की यह अनुगूंज लंबे समय तक श्रद्धालुओं के हृदय में बनी रहेगी।

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