हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एक्टिविटी सेंटर में आईजीएसआई की वार्षिक बैठक में विरासत संरक्षण,स्वच्छता और तकनीक आधारित विकास पर मंथन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एक्टिविटी सेंटर में ‘इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया (IGSI),गढ़वाल चैप्टर की वार्षिक बैठक गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एक्टिविटी सेंटर में ‘इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया (IGSI),गढ़वाल चैप्टर की वार्षिक बैठक गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम में शिक्षा,समाज और पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ,जिसमें विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.योगेंद्र नारायण (पूर्व महासचिव राज्यसभा एवं कुलाधिपति गढ़वाल विश्वविद्यालय) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज के दौर में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में उभरना होगा। उन्होंने समाज में सद्भावना,सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को सशक्त बनाने पर बल देते हुए कहा कि संगठित प्रयासों से ही सकारात्मक बदलाव संभव है। डॉ.नारायण ने इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरें आज दोहरी चुनौती का सामना कर रही हैं-एक ओर मानव हस्तक्षेप और दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन। इन धरोहरों के संरक्षण हेतु कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे,ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इन विरासत स्थलों को सोर्स ऑफ इनकम के रूप में विकसित कर स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ना समय की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सोशल वॉरियर्स की भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल चैप्टर के अध्यक्ष प्रो.एम.एम.सेमवाल ने क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग पर कचरा निस्तारण स्थलों की पहचान,शौचालयों की कमी और पर्वतीय क्षेत्रों में कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है,जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों दोनों को राहत मिल सके। प्रो.सेमवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था का उद्देश्य केवल विरासत संरक्षण तक सीमित नहीं है,बल्कि इन धरोहरों का दस्तावेजीकरण कर जनमानस में जागरूकता पैदा करना भी है,जिससे हमारी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष प्रो.सीमा धवन ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए सोसायटी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो.पूजा सकलानी ने कुशल संचालन करते हुए प्लास्टिक प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त की और इसके समाधान के लिए व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। राजनीति विज्ञान विभाग की शोधार्थी सुलक्षणा शर्मा ने पहाड़ी क्षेत्रों में ऊर्जा संकट और घोस्ट विलेज (उजड़े गांवों) की समस्या पर प्रकाश डालते हुए सौर ऊर्जा को एक प्रभावी विकल्प बताया। शिक्षा विभाग की शोधार्थी स्नेहलता ने सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) के महत्व को रेखांकित किया,वहीं एक छात्र ने पारंपरिक पहाड़ी भोजन संस्कृति के लुप्त होते स्वरूप पर चिंता जताई। बैठक में प्रो.सतीश सती (सचिव),प्रो.महेंद्र बाबू,डॉ.शेखर बहुगुणा,डॉ.वरुण बड़थ्वाल, डॉ.विजय सिंह बिष्ट,डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.जसपाल चौहान,डॉ.प्रकाश सिंह,डॉ.गिरीश भट्ट,डॉ.अन्नू राही सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। अंत में डॉ.राकेश नेगी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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