
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। शिमला मिर्च की खेती में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करना हर किसान का लक्ष्य होता है,लेकिन इसके लिए केवल पारंपरिक खेती पद्धतियां ही पर्याप्त नहीं होती। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी उपज में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। इसी क्रम में विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई एक महत्वपूर्ण तकनीक-क्राउन फ्लावर (प्रथम शीर्ष फूल) के साथ शुरुआती फूलों को हटाना-किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ.राजेंद्र कुकसाल के अनुसार शिमला मिर्च की फसल में जलवायु,उपजाऊ जीवांशयुक्त मिट्टी,उन्नत किस्मों का चयन,समय पर पौध रोपण,संतुलित उर्वरक प्रबंधन,सिंचाई,निराई-गुड़ाई तथा कीट एवं रोग नियंत्रण जैसे सभी कारकों का समुचित पालन आवश्यक है। लेकिन इन सबके साथ यदि पौधों के शुरुआती चरण में फूल प्रबंधन की वैज्ञानिक विधि अपनाई जाए,तो उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि संभव है। शिमला मिर्च के पौधे में मुख्य तने और उससे निकलने वाली पहली दो शाखाओं के बीच जो पहला फूल विकसित होता है,उसे क्राउन फ्लावर या किंग फ्लावर कहा जाता है। यह पौधे की प्रारंभिक अवस्था में बनता है,जब पौधा पूरी तरह विकसित और मजबूत नहीं होता। यदि इस फूल को फल बनने दिया जाए,तो पौधे की अधिकांश ऊर्जा उसी एक फल के विकास में खर्च हो जाती है,जिससे पौधे की शाखाओं का विस्तार रुक जाता है और आगे आने वाले फूलों व फलों की संख्या सीमित हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार क्राउन फ्लावर के साथ-साथ शुरुआती दो अन्य फूलों को भी कली अवस्था में हटा देना चाहिए। इससे पौधे की ऊर्जा जड़ों और शाखाओं के विकास में लगती है,जिससे पौधा अधिक मजबूत बनता है। परिणामस्वरूप आगे चलकर पौधे में अधिक संख्या में फूल और फल आते हैं,जिनका आकार बड़ा और गुणवत्ता बेहतर होती है। यह तकनीक विशेष रूप से पॉलीहाउस एवं खुले खेत-दोनों परिस्थितियों में समान रूप से प्रभावी है। पौध रोपण के लगभग 25 से 30 दिन बाद या जब पौधे में 15 से 16 पत्तियाँ विकसित हो जाएं,तब मुख्य तने के शीर्ष पर पहला फूल दिखाई देता है। यही क्राउन फ्लावर होता है,जिसे कली अवस्था में ही सावधानीपूर्वक हाथ से तोड़ देना चाहिए। इसके कुछ दिनों बाद मुख्य तने से दो शाखाएं निकलती हैं,जिनके सिरों पर भी एक-एक फूल बनता है। इन दोनों फूलों को भी कली अवस्था में हटाना आवश्यक होता है। यह कार्य सुबह या शाम के समय करना अधिक उपयुक्त माना जाता है,ताकि पौधे को कम से कम तनाव पड़े। अच्छी पैदावार के लिए केवल फूल प्रबंधन ही नहीं,बल्कि समय पर और सही तरीके से फल तुड़ाई भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को अत्यधिक बड़ा होने तक पौधे पर न छोड़ें। लगभग 200 से 250 ग्राम वजन होने पर फलों की तुड़ाई कर लें। सभी फलों को एक साथ तोड़ने के बजाय क्रमशः औसत आकार के फलों की तुड़ाई करते रहें,जिससे नए फल लगातार विकसित होते रहें। डॉ.कुकसाल का कहना है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ इस सरल लेकिन प्रभावी तकनीक को अपनाते हैं,तो वे न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं,बल्कि बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में अधिक मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं। शिमला मिर्च की खेती में क्राउन फ्लावर सहित शुरुआती तीन फूलों को हटाने की यह वैज्ञानिक विधि किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ का सशक्त माध्यम बन सकती है। सही समय पर सही निर्णय लेकर किसान अपनी मेहनत को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।