हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। नवरात्र की आध्यात्मिक ऊर्जा,मां भगवती की आराधना और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला,जब जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड कल्जीखाल अंतर्गत पट्टी पटवालस्यूं के ग्राम नलई में राम नवमी के पावन अवसर पर समलौण पौध रोपण कर एक प्रेरणादायी पहल की गई। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा बल्कि पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश भी समाज को दे गया। समलौण आन्दोलन के जिला संयोजक पवन पटवाल ने अपनी धर्मपत्नी दीपा देवी एवं माता शकुंतला देवी के साथ मिलकर कन्या पूजन के अवसर पर घर के आंगन में नौ दुर्गाओं शैलपुत्री,ब्रह्मचारिणी,चंद्रघंटा,कूष्मांडा,स्कंदमाता,कात्यायनी,कालरात्रि,महागौरी और सिद्धिदात्री के नाम पर तेजपत्ता समलौण के पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर उपस्थित कन्याओं के साथ पौधारोपण कर नवरात्र के समापन को यादगार और सार्थक बनाया गया। इस पहल की विशेषता यह रही कि धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक पूजा एक पौधा का संदेश दिया गया। पवन पटवाल ने कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा से घर में सुख,शांति और समृद्धि का वास होता है,वहीं पौधारोपण से प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि समलौण आन्दोलन का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं,बल्कि उन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य तैयार करना है। पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी दीपा देवी एवं शकुंतला देवी द्वारा ली गई,जो इस पहल को और भी प्रेरणादायक बनाता है। इस अवसर पर कन्या मानवी,रितिका,राधिका,तमन्ना,गुनगुन,आराध्य एवं अंशुमन सहित परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे और सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। आज के समय में जब पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है,ऐसे प्रयास न केवल समाज को जागरूक करते हैं,बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का अहसास भी कराते हैं। नवरात्र जैसे पवित्र पर्व पर इस प्रकार की पहल यह दर्शाती है कि हमारी परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति और जीवन के संतुलन का भी आधार हैं। ग्राम नलई में किया गया यह समलौण पौध रोपण कार्यक्रम एक मिसाल बनकर उभरा है,जहां आस्था और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलकर समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।