गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में हयवदन नाटक का सफल मंचन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र का मंच उस समय जीवंत हो उठा,जब विद्यार्थियों

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र का मंच उस समय जीवंत हो उठा,जब विद्यार्थियों ने प्रख्यात नाटककार गिरीश कर्नाड के चर्चित नाटक हयवदन का प्रभावशाली और यादगार मंचन किया। लगभग दो घंटे आठ मिनट तक चली इस प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा और अंत तक तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजता रहा। नाटक की प्रस्तुति एम.ए.रंगमंच एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों द्वारा की गई,जिन्होंने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता,संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से पात्रों को जीवंत कर दिया। मंच सज्जा,वेशभूषा और प्रकाश संयोजन ने भी प्रस्तुति को एक अलग ऊंचाई प्रदान की। इस संपूर्ण नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन केंद्र के सह-निदेशक महेंद्र पवार ने किया जिनके कुशल निर्देशन में नाटक ने कलात्मकता और तकनीकी दृष्टि से उत्कृष्टता हासिल की। वहीं संगीत संयोजन की कमान डिप्टी डायरेक्टर डॉ.संजय पांडे ने संभाली जिन्होंने संगीत के माध्यम से नाटक के भावों को और अधिक प्रभावशाली बनाया। तबला एवं परकशन पर जयेंद्र की सजीव संगत ने प्रस्तुति में ऊर्जा और लय का संचार किया। कार्यक्रम में केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी,पूर्व निदेशक डॉ.डी.आर.पुरोहित,डॉ.कपिल पंवार,डॉ.नागेंद्र रावत सहित अनेक प्राध्यापक एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे रंगमंचीय परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा आयोजित पांच दिवसीय भरतमुनि नाट्य समारोह में भी इस नाटक का मंचन किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित समारोह में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र की 17 सदस्यीय टीम निदेशक गणेश खुगशाल गणी के नेतृत्व में शुक्रवार को प्रयागराज के लिए रवाना हो गई है। यह प्रस्तुति न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है,बल्कि गढ़वाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का भी एक सशक्त प्रयास है। हयवदन का यह मंचन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं,बल्कि युवा कलाकारों की प्रतिभा,समर्पण और भारतीय रंगमंच की गहराई का सजीव उदाहरण बनकर उभरा है। अब सभी की निगाहें प्रयागराज में होने वाले मंचन पर टिकी हैं,जहां यह प्रस्तुति निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों को छुएगी।

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