गंगा स्वच्छता पखवाड़ा का भव्य समापन-रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी जोशीमठ/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखण्ड में गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को समर्पित अभियान गंगा स्वच्छता पखवाड़ा का आज 31 मार्च 2026 को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

जोशीमठ/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखण्ड में गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को समर्पित अभियान गंगा स्वच्छता पखवाड़ा का आज 31 मार्च 2026 को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ चमोली में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पुरस्कार वितरण के साथ भव्य समापन हुआ। नमामि गंगे इकाई द्वारा आयोजित इस समापन समारोह में छात्र-छात्राओं की प्रतिभा,उत्साह और पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया,जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। एकल नृत्य प्रतियोगिता में खुशी (बी.ए.प्रथम वर्ष) ने शानदार प्रस्तुति के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया,जबकि पिया (बी.ए.प्रथम वर्ष) द्वितीय और आयशा (बी.ए.प्रथम वर्ष) तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं एकल गायन प्रतियोगिता में प्रभा ने प्रथम तथा प्रेरणा ने द्वितीय स्थान हासिल किया। इसके अतिरिक्त दिया एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत समूह नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया और कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो.प्रीति कुमारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा की स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं,बल्कि हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया,ताकि स्वच्छ और सुंदर भारत की परिकल्पना साकार हो सके। इस अवसर पर नमामि गंगे इकाई द्वारा पूरे पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रथम,द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि युवा पीढ़ी न केवल अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा में आगे है,बल्कि पर्यावरण संरक्षण और गंगा स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति भी पूरी तरह जागरूक और जिम्मेदार है। जोशीमठ की इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब शिक्षा,संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी एक साथ जुड़ते हैं,तो परिवर्तन की राह खुद-ब-खुद बन जाती है।

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