शोध में नैतिकता,नवाचार और भारतीय का समागम-गढ़वाल विश्वविद्यालय बना ज्ञान विमर्श का केंद्र

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के केंद्र के रूप में उभरता नजर आया,जब शिक्षा एवं भौतिकी विभाग के संयुक्त

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार के केंद्र के रूप में उभरता नजर आया,जब शिक्षा एवं भौतिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आईसीएसएसआर प्रायोजित दस दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों,शोधार्थियों और प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। कार्यशाला का मूल उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) और आधुनिक शोध पद्धति के समन्वय के माध्यम से शिक्षकों और शोधार्थियों को सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाना है। उद्घाटन सत्र में विद्वानों ने शिक्षा,अनुसंधान,नवाचार और नैतिक मूल्यों के विविध आयामों पर गहन विचार-विमर्श प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अपने प्रभावशाली संबोधन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन्स के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शोध केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि यह एक जिम्मेदारीपूर्ण और अनुशासित साधना है,जिसमें ईमानदारी सर्वोपरि है।‌ उन्होंने शोधार्थियों को सलाह दी कि वे अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण रखते हुए यूजीसी दिशा-निर्देशों का गंभीरता से अध्ययन करें और उन्हें व्यवहार में उतारें। प्रो.सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए शोधार्थियों को अनुशासन समयबद्धता और उत्तरदायित्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक आदर्श शोधार्थी वही है,जो अपने सुपरवाइजर के प्रति भी उतना ही प्रतिबद्ध हो जितना अपने शोध कार्य के प्रति।‌ उन्होंने युवाओं को बाहरी राजनीति,अनावश्यक चर्चाओं और ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि उनका लक्ष्य समाजोपयोगी ज्ञान का सृजन होना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.पी.वी.बी.सुब्रमण्यम निदेशक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रणाली गुरु-शिष्य परंपरा,अनुभवजन्य शिक्षा और समग्र विकास की आधारशिला पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि यह केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं,बल्कि चरित्र निर्माण,नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कार्यशालाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शोध पद्धति के साथ पारंपरिक ज्ञान को जोड़ने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार यही समन्वय भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रासंगिक बनाएगा। चौरास परिसर के निदेशक प्रो.राजेन्द्र सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय परिसर की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए इसे अनुशासन हरियाली और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक बताया। उन्होंने कुलपति के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का समग्र विकास उनके विजन का परिणाम है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल (आरडीसी) के निदेशक प्रो.हेमवती नंदन ने शिक्षा और विज्ञान में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शोध तभी सार्थक है,जब उसके परिणाम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उन्होंने नवाचार को व्यवहारिक धरातल पर उतारने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में डीन रिक्रूटमेंट एवं प्रमोशन प्रो.मोहन सिंह पंवार तथा भौतिकी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.टी.सी.उपाध्याय ने कार्यशाला के निदेशक डॉ.देवेंद्र सिंह एवं सह-कोर्स निदेशक डॉ.आलोक सागर गौतम को शुभकामनाएं देते हुए नवाचार आधारित शिक्षा प्रणाली को अपनाने का आह्वान किया। सह-कोर्स निदेशक डॉ.आलोक सागर गौतम ने कार्यशाला की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आईसीएसएसआर दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है,जिसमें देश के विभिन्न राज्यों-दिल्ली,राजस्थान,बिहार,उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से चयनित 30 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन चार सत्र आयोजित होंगे,जिनमें विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल रहेगा। कार्यक्रम के अंत में कोर्स निदेशक डॉ.देवेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए आईसीएसएसआर के चेयरपर्सन प्रो.धनंजय सिंह सहित सभी अतिथियों,प्रतिभागियों और आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.अनु राही द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षा एवं भौतिकी विभाग के अनेक प्राध्यापक,शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। यह कार्यशाला न केवल शैक्षणिक उन्नयन का माध्यम बन रही है,बल्कि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक नई दिशा स्थापित करने की ओर भी सशक्त कदम साबित हो रही है।

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