पित्रों की स्मृति में हरियाली का संकल्प-कोठला गांव में समलौण परंपरा बनी पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड पाबो अंतर्गत पट्टी बाली कण्डारस्यूं के ग्राम कोठला में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली,जहां पित्रों की स्मृति को

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड पाबो अंतर्गत पट्टी बाली कण्डारस्यूं के ग्राम कोठला में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली,जहां पित्रों की स्मृति को सहेजते हुए पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया गया। ग्राम निवासी कैलाश नौटियाल एवं सुनीता देवी ने पित्र पूजन के पावन अवसर पर समलौण वन में अनार का पौधा रोपकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। इस अवसर पर पौधारोपण केवल एक परंपरा तक सीमित नहीं रहा,बल्कि यह प्रकृति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया। रोपे गए पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं सुनीता देवी ने ली,जो इस पहल की गंभीरता और संकल्प को दर्शाता है। कार्यक्रम का संचालन समलौण सेना की नायिका बीरा देवी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि उनके गांव में प्रत्येक संस्कार चाहे वह जन्म हो,विवाह हो या पित्र स्मरण के अवसर पर समलौण के रूप में पौधारोपण की परंपरा निभाई जाती है। यह परंपरा अब एक भावनात्मक आंदोलन का रूप ले चुकी है,जो परिवार की सीमाओं से निकलकर पूरे समाज में फैल रही है। बीरा देवी ने क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि केवल पौधारोपण ही नहीं,बल्कि उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले,तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। इस प्रेरणादायक पहल में गांव की समलौण सेना की सदस्य सुनीता देवी,मीना देवी,शैलेजा देवी,कान्ति देवी,राधा देवी,देवेश्वरी देवी और नरेंद्र नौटियाल सहित अन्य ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही,जिसने इस आयोजन को सामूहिक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में परिवार द्वारा इस पुण्य कार्य को प्रोत्साहित करने हेतु 500 रुपये की नगद राशि पुरस्कार स्वरूप भेंट की गई,जो समाज में सकारात्मक कार्यों को बढ़ावा देने का सराहनीय कदम है। निस्संदेह कोठला गांव की यह समलौण पहल आज के समय में एक प्रेरणादायक संदेश दे रही है-जहां परंपरा,आस्था और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम देखने को मिलता है।

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