गढ़वाल विश्वविद्यालय में आईसीएसएसआर प्रायोजित रिसर्च मेथडोलाॅजी कोर्स का दुसरा दिन संपन्न

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित 10 दिवसीय शोध

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित 10 दिवसीय शोध कार्यप्रणाली कार्यशाला का दूसरा दिन उत्साह,ज्ञान और नवाचार से भरपूर रहा। कार्यशाला का यह चरण प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ,जिसमें शोध के आधुनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। द्वितीय दिवस का प्रथम सत्र प्रोफेसर सीमा धवन द्वारा संचालित किया गया,जिसमें उन्होंने शोध कार्य हेतु एकीकृत सांख्यिकीय विधियों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आधुनिक शोध में विभिन्न सांख्यिकीय उपकरणों का समुचित प्रयोग किस प्रकार शोध की गुणवत्ता को सुदृढ़ करता है। इसके पश्चात द्वितीय सत्र में डॉ.अखिलेश कुमार गौतम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शोध कार्यप्रवाह के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है और इसके समुचित उपयोग से शोध कार्य अधिक सटीक,तीव्र और प्रभावी बनाया जा सकता है। तृतीय सत्र में डॉ.हर सिंह ने ई-पुस्तकालय के विविध संसाधनों और उपकरणों के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध शोध सामग्री तक प्रभावी पहुंच बनाने के तरीके समझाए,जिससे शोध कार्य को अधिक सशक्त बनाया जा सके। चतुर्थ सत्र के अंतर्गत प्रतिभागियों को चौरास परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय का शैक्षिक भ्रमण कराया गया,जहां उन्हें पुस्तकालय की आधुनिक सुविधाओं,डिजिटल संसाधनों और शोध संबंधी व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला के निदेशक डॉ.देवेंद्र सिंह (शिक्षा विभाग) एवं सह-निदेशक डॉ.आलोक कुमार गौतम (भौतिक विज्ञान विभाग) द्वारा सभी विशेषज्ञों का पुष्पगुच्छ,अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया तथा उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। इस कार्यशाला की विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए शोध के व्यावहारिक पहलुओं का भी गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है,जिससे वे भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य करने में सक्षम बन सकें। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन प्रतिभागी पायल विज एवं वैभव कुमार द्विवेदी द्वारा किया गया,जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित एवं रोचक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्यशाला शोध के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ युवा शोधार्थियों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

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