
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की धरती एक बार फिर महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनने जा रही है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित शैक्षणिक गतिविधि केंद्र में आगामी 7 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड में महिला कृषि-उद्यमी: सतत आजीविका के लिए स्थानीय ज्ञान से वैश्विक लक्ष्यों की ओर विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है,जिसका उद्देश्य महिला कृषकों की भूमिका को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करना और उनके पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक विकास लक्ष्यों से जोड़ना है। संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग एवं मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस मंच पर देशभर से शिक्षाविद,शोधार्थी,प्रगतिशील महिला कृषक,नीति-निर्माता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एकत्रित होकर महिला कृषि उद्यमिता के विविध आयामों पर गहन मंथन करेंगे। कार्यक्रम के संयोजक एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि संगोष्ठी में महिला कृषकों की उद्यमिता,स्थानीय पारंपरिक ज्ञान,सतत कृषि प्रणाली,ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण तथा सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के संदर्भ में विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संगोष्ठी की विशेषता यह भी होगी कि इसमें प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से चयनित 35 सफल महिला कृषि उद्यमियों को मंच प्रदान किया जाएगा,जो अपने अनुभवों और नवाचारों के माध्यम से अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। यह पहल न केवल उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करेगी,बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को भी रेखांकित करेगी। कार्यक्रम के दौरान मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन भी संपन्न होगा,जो भविष्य में शोध,प्रशिक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। यह संगोष्ठी उत्तराखंड की महिला कृषक उद्यमियों के पारंपरिक ज्ञान,नवाचार और सतत आजीविका में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त पहल साबित होगी। साथ ही यह मंच महिला सशक्तिकरण,ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करने में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।