
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गर्व और सम्मान का क्षण है कि 2 अप्रैल से 8 अप्रैल तक आयोजित कर्मयोगी साधना सप्ताह मिशन लाइफ के अंतर्गत देशभर से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर प्रस्तुति हेतु केवल छह विश्वविद्यालयों का चयन किया गया,जिनमें इस विश्वविद्यालय का नाम भी प्रमुखता से शामिल हुआ है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है,बल्कि पर्यावरण संरक्षण,सतत विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उसके निरंतर प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करती है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से पर्यावरण विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो.आर.के.मैखुरी तथा शिक्षा विभाग के डॉ.अमरजीत सिंह परिहार द्वारा प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति में मिशन लाइफ के उद्देश्यों,सतत जीवनशैली को अपनाने की आवश्यकता,पर्यावरण संरक्षण के उपायों तथा जन-जागरूकता से संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों और पहलों को विस्तारपूर्वक और सशक्त ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि किस प्रकार विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों,शोधार्थियों और समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इन प्रयासों ने ही विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कर्मयोगी टीम एवं मिशन लाइफ से जुड़े सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की सामूहिक मेहनत,समर्पण और दूरदृष्टि का परिणाम है,जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा भी विश्वविद्यालय की इस प्रस्तुति और प्रयासों की सराहना की गई,जो पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। गढ़वाल विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि न केवल उसकी प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ करती है,बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी पर्यावरण संरक्षण,सतत जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रेरित करने का कार्य करती है। यह सफलता आने वाले समय में विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है।