हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् चैरिटेबल ट्रस्ट श्रीनगर द्वारा आयोजित भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान समारोह रविवार को संस्कृति और शिक्षा के एक भव्य संगम के रूप में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जहां लोक संस्कृति को नई ऊर्जा मिली, वहीं नवोदित प्रतिभाओं को सम्मानित कर भविष्य की आशा भी जगाई गई। इस वर्ष का स्व.भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान सुप्रसिद्ध लोकगायिका रेखा धस्माना उनियाल को प्रदान किया गया। उनके गाए गीतों ने गढ़वाली लोक संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोड़ने का कार्य किया है। प्रतिभाओं को प्रोत्साहन परीक्षा 2024-25 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई जिसमें लखन बहादुर (राजकीय इंटर कॉलेज सुमाड़ी को स्व.हरिशरण काला छात्रवृत्ति),कु.सौम्या को स्व.जयंती काला स्मृति छात्रवृत्ति,किशन सिंह (राजकीय इंटर कॉलेज श्रीनगर) को हरिशरण काला छात्रवृत्ति,तथा कु.शानू (राजकीय बालिका इंटर कॉलेज श्रीनगर) को स्व.कौशल्या देवी नैथानी छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इन चारों को रुपए 5000 नकद,प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड राज्य सूचना आयुक्त योगेश धस्माना ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और शिक्षा दोनों को मजबूती देते हैं। भास्करानंद मैठाणी जैसे व्यक्तित्व सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे। विशिष्ट अतिथि प्रो.एस.पी.सती (कुलसचिव रानीचौरी कृषि विश्वविद्यालय) ने कहा आज के बच्चे ही कल के उत्तराखण्ड और भारत का भविष्य हैं। उन्हें शिक्षा और संस्कृति से जोड़ना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अध्यक्षता कर रही प्रो.मंजुला राणा डीन आर्ट्स फैकल्टी ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोक संस्कृति और साहित्य हमारे अस्तित्व की जड़ें हैं और इस प्रकार का सम्मान समारोह हमारी धरोहर को सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में शालिनी बहुगुणा विजल्वाण और वसुधा गौतम ने मधुर गीत प्रस्तुत किए। जयदयाल संस्कृत विद्यालय के बच्चों ने स्वस्ति वाचन कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा दी। हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् चैरिटेबल ट्रस्ट की मुख्य ट्रस्टी उमा मैठाणी ने अपने मार्गदर्शन और अथक प्रयासों से इस आयोजन को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। उनका कहना था कि भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं,बल्कि संस्कृति और शिक्षा को जोड़ने वाला जीवंत सेतु है। उनकी दूरदृष्टि और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण ही इस ट्रस्ट की गतिविधियों की वास्तविक शक्ति है। ट्रस्ट के संरक्षक कृष्णानंद मैठाणी ने सभी अतिथियों का स्वागत व आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन कविराज नीरज नैथाणी व शिक्षाविद प्रकाश चन्द्र चमोली ने किया। भव्य आयोजन का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ,जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत कर दिया। यह समारोह केवल सम्मान नहीं,बल्कि हिमालयी संस्कृति और शिक्षा के उज्ज्वल भविष्य की घोषणा था। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि शिक्षा और संस्कृति हाथ में हाथ डालकर चलें,तो समाज की जड़ों को गहराई और भविष्य को दिशा मिलती है। भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संकल्प है कि हम अपनी धरोहर को संजोकर ही आगे बढ़ेंगे,तभी उत्तराखण्ड की धरती ज्ञान,कला और लोक संस्कृति का वास्तविक तीर्थ बन सकेगी।
📈
ट्रेंडिंग
ख़बर
ट्रेंडिंग
ख़बर
- Home / उत्तराखंड समाचार
भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान-लोक संस्कृति और शिक्षा का महापर्व
हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् चैरिटेबल ट्रस्ट श्रीनगर द्वारा आयोजित भास्करानंद मैठाणी स्मृति सम्मान समारोह रविवार को संस्कृति और शिक्षा के एक भव्य संगम के रूप में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जहां लोक
📘 इन्हें भी पढ़ें
- सम्बंधित खबरे
नवीनतम समाचार
Loading...