समलौण पौध रोपकर पुण्यात्मा को दी श्रद्धांजलि,पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण पट्टी ढाईज्यूली के ग्राम गडोली में एक अनूठा और प्रेरणादायी आयोजन देखने को मिला। स्व.मुरलीधर भट्ट की धर्मपत्नी स्व.राजेश्वरी देवी की वार्षिक पुण्यतिथि के अवसर पर उनके सुपुत्र

📘 इन्हें भी पढ़ें

जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण पट्टी ढाईज्यूली के ग्राम गडोली में एक अनूठा और प्रेरणादायी आयोजन देखने को मिला। स्व.मुरलीधर भट्ट की धर्मपत्नी स्व.राजेश्वरी देवी की वार्षिक पुण्यतिथि के अवसर पर उनके सुपुत्र मुकेश भट्ट एवं उमेश भट्ट ने कुलदेवी मां हरियाली मंदिर परिसर में पीपल का समलौण पौधा रोपकर पुण्यात्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर दोनों भाइयों ने ईश्वर से माता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की। पौधारोपण के दौरान धार्मिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना पंडित भुवनेश भट्ट ने संपन्न कराई। वहीं पौधे के संरक्षण का संकल्प पुत्र उमेश भट्ट ने लिया। इस अवसर पर पूरा परिवार,ग्रामवासी और समलौण आन्दोलन के कार्यकर्ता भावनात्मक रूप से जुड़े नजर आए। कार्यक्रम का संचालन समलौण संस्था के संस्थापक बीरेंद्र दत्त गोदियाल ने किया। उन्होंने कहा कि मानव इस सृष्टि का सबसे श्रेष्ठ प्राणी है,लेकिन आधुनिक भौतिकवादी जीवनशैली में पर्यावरण के प्रति उसकी संवेदनशीलता कम होती जा रही है। यही कारण है कि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और हम बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा यदि हम जीवन के हर संस्कार में समलौण पौधारोपण को शामिल करें तो परिवार के सभी सदस्य भावनात्मक रूप से उससे जुड़े रहेंगे और पौधों का संरक्षण करेंगे। यही हमारी धरती को मजबूत बनाएगा और ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से मुक्ति दिलाएगा। गोदियाल ने आगे कहा कि पुण्यात्मा की स्मृति में रोपा गया यह पौधा भविष्य में समलौण पित्रदेव वृक्ष के रूप में पहचाना जाएगा और समय के साथ समलौण पित्रिवन का स्वरूप लेगा। इस अवसर पर समलौण आन्दोलन के सलाहकार डॉ.दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि यह पहल अपने आप में अनोखी और प्रेरणादायी है। गांव-गांव में छोटी-छोटी समलौण सेनाएं बन चुकी हैं,जो संस्कारों के हर अवसर को पौधरोपण से जोड़ रही हैं। उन्होंने पीपल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह वृक्ष दिन-रात सबसे अधिक ऑक्सीजन प्रदान करता है और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पूजनीय है। आन्दोलन की संयोजिका कौशल्या देवी भट्ट ने कहा कि समलौण पौधारोपण केवल एक पर्यावरणीय पहल नहीं,बल्कि यह भावनात्मक आंदोलन है,जो समाज के दिलों से जुड़ चुका है। यह न केवल उत्तराखंड बल्कि देश के अन्य राज्यों तक भी फैल रहा है। परिवार और ग्रामीणों की भावनात्मक सहभागिता-पौधारोपण के इस अवसर पर स्व.राजेश्वरी देवी की चारों पुत्रियां सुमन देवी धस्माना,सुनीता देवी गोदियाल,अनीता देवी गोदियाल,रामेश्वरी देवी नौटियाल तथा चारों जंवाई जगदीश प्रसाद धस्माना,यशोधर प्रसाद गोदियाल,बीरेंद्र दत्त गोदियाल और सुरेंद्र नौटियाल उपस्थित रहे। इसके साथ ही भतीजे रमेश चंद्र भट्ट,दिनेश चंद्र भट्ट,भुवनेश भट्ट,बिमलेश भट्ट,रेखा देवी काला,गांव की समलौण सेना नायिका गुड्डी देवी,सदस्य ज्योति देवी,लक्ष्मी देवी सहित अनेक ग्रामीण और अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए। यह आयोजन केवल वार्षिक पिंडदान तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसमें श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्व.राजेश्वरी देवी की स्मृति में रोपा गया पौधा न केवल उनकी याद को जीवित रखेगा,बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरणीय चेतना और संस्कारों की प्रेरणा देता रहेगा।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...