आदर्श शिक्षक दिपक जोशी को भावभीनी विदाई-समलौण पौधारोपण के साथ शिक्षा,संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षक केवल ज्ञान का प्रकाश ही नहीं फैलाता,बल्कि अपने संस्कारों,अनुशासन और व्यक्तित्व से समाज की भावी पीढ़ी का निर्माण भी करता है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षक केवल ज्ञान का प्रकाश ही नहीं फैलाता,बल्कि अपने संस्कारों,अनुशासन और व्यक्तित्व से समाज की भावी पीढ़ी का निर्माण भी करता है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड थलीसैंण स्थित संकुल पैठाणी के अंतर्गत राजकीय जूनियर हाई स्कूल पल्ली में कार्यरत सहायक अध्यापक एवं सीआरसी समन्वयक दीपक जोशी के स्थानांतरण पर आयोजित विदाई समारोह भावनाओं,सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संदेश का साक्षी बना। संपूर्ण संकुल परिवार ने उन्हें आत्मीय सम्मान के साथ भावभीनी विदाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य,उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। समारोह में शिक्षकों ने दीपक जोशी के लगभग 24 वर्षों के समर्पित शैक्षिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राठ क्षेत्र के दुर्गम विद्यालयों में रहकर शिक्षा की अलख जगाई और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। उनके मार्गदर्शन में अध्ययन करने वाले अनेक छात्र-छात्राएं आज विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मरखोला के प्रधानाध्यापक दिनेश चंद्र खंकरियाल ने गढ़वाली कविता के माध्यम से दीपक जोशी के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि उनकी सरलता,अनुशासन,कर्मनिष्ठा और छात्रहित के प्रति समर्पण को राठ क्षेत्र कभी भुला नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षक शिक्षा जगत की अमूल्य धरोहर होते हैं। राजकीय जूनियर हाई स्कूल पल्ली के प्रधानाध्यापक अनंत रावत ने कहा कि दीपक जोशी सीखने की अद्भुत जिज्ञासा रखने वाले शिक्षक हैं। उन्होंने सदैव नई शिक्षण विधियों को अपनाकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया। उनका सकारात्मक दृष्टिकोण और कार्य के प्रति समर्पण सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। जनता जूनियर हाई स्कूल जाख के सहायक अध्यापक राजेश रतूड़ी,राजकीय प्राथमिक विद्यालय चाकीसैंण की प्रधानाध्यापिका प्रीति जदली सुंद्रियाल,पाटुली की प्रधानाध्यापिका पुष्पा देवी ध्यानी,कुवाखर्क के प्रधानाध्यापक कन्हैयालाल नौटियाल तथा भटकोट के प्रधानाध्यापक विजयदीप सहित अनेक शिक्षकों ने दीपक जोशी को एक आदर्श,अनुशासित,कर्मठ एवं विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले शिक्षक के रूप में याद किया। अपने संबोधन में दीपक जोशी ने भावुक होते हुए कहा कि वर्ष 2002 से लेकर वर्तमान तक 24 वर्षों तक राठ क्षेत्र में सेवा करने का सौभाग्य उन्हें मिला। यहां के विद्यालय,विद्यार्थी,अभिभावक और शिक्षक परिवार सदैव उनके हृदय में विशेष स्थान बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि संकुल स्तर पर पहली बार इस प्रकार सम्मानपूर्वक विदाई मिलना उनके लिए अविस्मरणीय स्मृति है। उन्होंने सभी शिक्षकों के सहयोग,आत्मीयता और उत्कृष्ट समन्वय के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस स्नेह को वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी और आकर्षण का केंद्र रहा समलौण पौधारोपण अभियान। समलौण संस्था के संस्थापक एवं राजकीय जूनियर हाई स्कूल पाटुली के सहायक अध्यापक बीरेन्द्र दत्त गोदियाल ने दीपक जोशी के हाथों राजकीय प्राथमिक विद्यालय भटकोट परिसर में मोरपंखी का समलौण पौधा रोपवाकर विदाई समारोह को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि विदाई के अवसर पर पौधा रोपना केवल एक औपचारिकता नहीं,बल्कि प्रकृति,संस्कृति और स्मृतियों को सहेजने का सशक्त माध्यम है। जब यह पौधा विकसित होकर विशाल वृक्ष बनेगा,तब यह दीपक जोशी के समर्पण,सेवा और व्यक्तित्व की यादों को भी जीवंत बनाए रखेगा। पौधे के संरक्षण एवं नियमित देखभाल की जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजयदीप ने ग्रहण की। कार्यक्रम का संचालन राजकीय प्राथमिक विद्यालय जाख के प्रधानाध्यापक अशोक कैंथोला ने किया। उन्होंने कहा कि दीपक जोशी विवेकशीलता,उत्साह,सहकारिता,कार्यकुशलता,अनुशासन,नवाचार और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण ऐसे शिक्षक हैं, जिनका मार्गदर्शन संपूर्ण संकुल को भविष्य में भी प्रेरित करता रहेगा। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह रावत,राकेश कुमार बहुगुणा,कैलाश सिंह बर्त्वाल,जगदीश नौड़ियाल,मंजू पाल,सविता चमोली,पूनम रानी,रश्मि रावत,रेखा बड़थ्वाल,पूनम भारती,बाल सिंह,विनोद ध्यानी,अंकित सिंह,मुकेश निराला,सीआरपी साक्षी बिष्ट,दौलत सिंह रावत सहित संकुल के अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। विदाई समारोह ने यह संदेश दिया कि एक सच्चा शिक्षक अपने विद्यालय से भले ही स्थानांतरित हो जाए,लेकिन अपने ज्ञान,संस्कार,समर्पण और विद्यार्थियों के हृदय में वह सदैव जीवित रहता है। वहीं समलौण के पौधारोपण ने इस विदाई को हरियाली,पर्यावरण संरक्षण और मधुर स्मृतियों का ऐसा प्रतीक बना दिया,जो आने वाले वर्षों तक समाज को प्रेरणा देता रहेगा।

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