
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मानसून के दस्तक देते ही उत्तराखंड में भूस्खलन,बादल फटना और नदियों के उफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की समय रहते की गई तैयारी ही सबसे प्रभावी हथियार होती है। इसी उद्देश्य को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में गुरुवार को जनपद पौड़ी में राज्य स्तरीय आपदा मॉक ड्रिल का व्यापक आयोजन किया गया। जिले के सात अति संवेदनशील स्थानों पर अलग-अलग आपदा परिदृश्यों का सजीव अभ्यास कर राहत एवं बचाव तंत्र की कार्यक्षमता,विभागीय समन्वय,संसाधनों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की गहन पड़ताल की गई। पूरे अभियान की निगरानी जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने कलेक्ट्रेट स्थित एकीकृत कंट्रोल रूम से करते हुए प्रत्येक गतिविधि पर पैनी नजर बनाए रखी। यह अभ्यास केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा,बल्कि वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियां तैयार कर विभिन्न विभागों की तत्परता,निर्णय लेने की क्षमता और संसाधनों के समुचित उपयोग का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट था कि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक पल की भी देरी न हो तथा प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। कंट्रोल रूम में मौजूद जिलाधिकारी को सुबह 9.15 बजे सतपुली-गुमखाल मार्ग पर भूस्खलन से सड़क बाधित होने और 20 से 30 लोगों के फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही पुलिस,एसडीआरएफ,स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गईं। राहत दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायलों का रेस्क्यू कर उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से हंस फाउंडेशन अस्पताल,सतपुली पहुंचाया। इसके बाद थलीसैंण क्षेत्र में बादल फटने,कोटद्वार के सिम्बलचौड़ में सुखरौ नदी का जलस्तर बढ़ने,श्रीनगर के फरासू क्षेत्र में भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध होने,धारी देवी के समीप गोवा बीच क्षेत्र में अलकनंदा के जलस्तर में वृद्धि,अल्केश्वर घाट तथा लक्ष्मणझूला में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर जैसे विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर क्रमवार अभ्यास किया गया। हर स्थान पर राहत एवं बचाव दलों ने प्रभावित लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू,घायलों को अस्पताल पहुंचाने,वैकल्पिक मार्गों पर यातायात डायवर्ट करने तथा राहत सामग्री पहुंचाने जैसी कार्यवाहियों का सफल प्रदर्शन किया। विशेष रूप से लक्ष्मणझूला क्षेत्र में लगभग 2500 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभ्यास प्रशासन,पुलिस,एसडीआरएफ,स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण बना। इस दौरान संचार व्यवस्था,आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता,एंबुलेंस सेवाएं,मशीनरी और विभागीय तालमेल को भी परखा गया। मॉक ड्रिल के उपरांत आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा के समय सूचना तंत्र,संचार व्यवस्था और विभागीय समन्वय में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आवश्यक उपकरणों,जेसीबी मशीनों,एंबुलेंस,राहत सामग्री और प्रशिक्षित मानव संसाधनों को हर समय तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही ग्राम प्रधानों,महिला मंगल दलों,युवक मंगल दलों तथा स्थानीय स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया,ताकि आपदा के शुरुआती क्षणों में स्थानीय स्तर पर त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि जनसहभागिता का भी विषय है। नियमित मॉक ड्रिल और पूर्व तैयारियों से न केवल विभागों की कार्यक्षमता बढ़ती है,बल्कि आम नागरिकों में भी आपदा के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास विकसित होता है। मॉक ड्रिल के समापन पर इंसीडेंट कमांडरों ने डी-ब्रीफिंग के माध्यम से पूरे अभ्यास की समीक्षा करते हुए उपलब्ध संसाधनों,कार्यप्रणाली और चिन्हित कमियों पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस अभ्यास से मिली सीख भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी,त्वरित एवं व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।