आषाढ़ गुप्त नवरात्रि-साधना,सिद्धि और शक्ति आराधना का महापर्व,मां दक्षिण काली की कृपा से दूर होते हैं भय,बाधाएं और संकट

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। सनातन संस्कृति में शक्ति की उपासना केवल धार्मिक परंपरा नहीं,बल्कि आत्मशुद्धि,आत्मबल और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य माध्यम मानी गई है। वर्ष भर में आने वाली चार

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। सनातन संस्कृति में शक्ति की उपासना केवल धार्मिक परंपरा नहीं,बल्कि आत्मशुद्धि,आत्मबल और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य माध्यम मानी गई है। वर्ष भर में आने वाली चार नवरात्रियों में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष स्थान है। यह नवरात्रि बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मचिंतन,साधना,मंत्र-जाप,तप और आध्यात्मिक उन्नति का पावन अवसर प्रदान करती है। वर्ष 2026 में यह पवित्र पर्व 15 जुलाई से 23 जुलाई तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। मां दक्षिण काली के उपासक एवं इस विशेष आलेख के लेखक अखिलेश चन्द्र चमोला कहते हैं कि गुप्त नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि वास्तविक साधना दिखावे में नहीं,बल्कि मन की पवित्रता,मौन,संयम और ईश्वर के प्रति अटूट समर्पण में निहित है। जब साधक अपने भीतर के अहंकार,क्रोध और नकारात्मकता का त्याग करता है, तभी मां आदिशक्ति की कृपा उसके जीवन में उतरती है। गुप्त नवरात्रि क्यों है विशेष जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि पूरे देश में उत्सव और भक्ति के साथ मनाई जाती हैं,वहीं गुप्त नवरात्रि शक्ति साधकों,तपस्वियों और आध्यात्मिक साधना करने वालों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन नौ दिनों में श्रद्धा,अनुशासन और मंत्र-जाप के माध्यम से साधक आत्मिक ऊर्जा का अनुभव करता है तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष गुप्त नवरात्रि में अनेक शुभ योग बन रहे हैं,जिन्हें धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। 15 जुलाई को प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर मां भगवती का आह्वान किया जाएगा। श्रद्धालु नौ दिनों तक अखंड दीप,दुर्गा सप्तशती पाठ,मंत्र-जाप और सात्विक जीवनचर्या के माध्यम से देवी की आराधना करेंगे। गुप्त नवरात्रि को दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां काली,तारा,त्रिपुर सुंदरी षोडशी,भुवनेश्वरी,छिन्नमस्ता,त्रिपुर भैरवी,धूमावती,बगलामुखी,मातंगी और कमला की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। अखिलेश चन्द्र चमोला कहते हैं दस महाविद्याएं केवल देवी के स्वरूप नहीं,बल्कि मानव जीवन की दस दिव्य शक्तियों का प्रतीक हैं। इनकी उपासना साधक के भीतर आत्मविश्वास,विवेक,धैर्य,निर्भयता और आध्यात्मिक चेतना का विकास करती है। देवभूमि उत्तराखंड में मां दक्षिण काली की उपासना की विशेष परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दक्षिण काली अपने भक्तों के भय,संकट,शत्रु बाधाओं और मानसिक अशांति का नाश कर उन्हें साहस,संरक्षण और आत्मबल प्रदान करती हैं। मां दक्षिण काली के उपासक अखिलेश चन्द्र चमोला कहते हैं मां दक्षिण काली का दक्षिण स्वरूप करुणा,संरक्षण और कल्याण का प्रतीक है। मां अपने भक्तों के जीवन से अज्ञान,भय और निराशा को दूर कर उन्हें धर्म,सत्य और सद्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। मां की कृपा से सबसे कठिन परिस्थितियां भी सरल होने लगती हैं। साधकों के लिए सरल साधना जो श्रद्धालु तांत्रिक साधना नहीं करते,वे भी श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। प्रातःकाल स्नान कर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें। नौ दिनों तक सात्विक भोजन,संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें। प्रतिदिन मां दक्षिण काली के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर लाल पुष्प अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक ॐ क्रीं कालिकायै नमः मंत्र का यथाशक्ति जप करें। यथासंभव दुर्गा सप्तशती,देवी कवच अथवा काली चालीसा का पाठ करें। जरूरतमंदों की सेवा,गौसेवा,अन्नदान और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें। देवभूमि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं,बल्कि शिव और शक्ति की अनादि तपोभूमि है। कालीमठ,दक्षिण काली मंदिर हरिद्वार सहित अनेक सिद्धपीठों में गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना,शहवन,जप,अनुष्ठान और साधना का आयोजन होता है,जहां देश-विदेश से श्रद्धालु और साधक पहुंचते हैं। अखिलेश चन्द्र चमोला का कहना है सच्ची शक्ति साधना वही है,जो व्यक्ति के भीतर सेवा,करुणा,विनम्रता और मानवता का भाव जगाए। यदि साधना के बाद हमारा व्यवहार नहीं बदलता,तो हमारी पूजा अधूरी है। मां दक्षिण काली अपने भक्तों को केवल सिद्धियां ही नहीं,बल्कि लोककल्याण का मार्ग भी दिखाती हैं। देवभूमि से संदेश आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आत्म-जागरण,संयम और शक्ति आराधना का दिव्य अवसर है। आइए इन पावन दिनों में हम केवल पूजा-अर्चना ही नहीं,बल्कि अपने विचारों,आचरण और जीवन को भी पवित्र बनाने का संकल्प लें। मां दक्षिण काली की असीम कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख,शांति,आरोग्य,समृद्धि,आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो तथा समूचे विश्व में मानवता,सद्भाव और धर्म का प्रकाश फैले-अखिलेश चन्द्र चमोला मां दक्षिण काली उपासक देवभूमि उत्तराखंड।

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