
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन व आध्यात्मिक धरा पर स्थित खेट पर्वत एक बार फिर धार्मिक आस्था,लोक-संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र बनने जा रहा है। समुद्र तल से लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दिव्य स्थल वर्षों से श्रद्धालुओं,प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। स्थानीय लोक-मान्यताओं में इसे परियों का देश कहा जाता है,जहां मां दुर्गा की अलौकिक कृपा और हिमालय की दिव्यता एक साथ अनुभव होती है। आगामी 15 जून से 23 जून 2026 तक यहां स्थित मधु-कैट मर्दनी मां दुर्गा मंदिर में विशाल पर्यटक मेला,देवी भागवत महापुराण,धार्मिक अनुष्ठान एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र में श्रद्धा,उत्साह और धार्मिक वातावरण चरम पर है। प्राकृतिक सौंदर्य और देवी शक्ति का अद्भुत संगम है खेट पर्वत भागीरथी और भिलंगना की गोद में स्थित खेट पर्वत प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है। यहां के बुग्याल,बर्फ से ढकी चोटियां,शीतल हवाएं और दिव्य वातावरण हर आगंतुक को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं। मान्यता है कि प्राचीन समय में यह स्थान देवशक्तियों और परियों का निवास स्थल रहा है। यही कारण है कि यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति,ऊर्जा और मां दुर्गा की दिव्य उपस्थिति का अनुभव होता है। 1983 में प्रेमदत्त नोटियाल कामरेड ने की थी खेट पर्वत की खोज,खेट पर्वत को धार्मिक एवं पर्यटन क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का श्रेय प्रसिद्ध समाजसेवी एवं दूरदर्शी व्यक्तित्व प्रेमदत्त नोटियाल कामरेड को जाता है। बताया जाता है कि उन्होंने 14 जनवरी 1983 को इस दिव्य स्थल की खोज कर इसे धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया था। इसके बाद क्षेत्रवासियों,श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से यहां निरंतर विकास कार्य प्रारंभ हुए। आज यहां मंदिर निर्माण,यात्री सुविधाएं,रास्ते,धर्मशाला,पेयजल व्यवस्था,वृक्षारोपण,विशाल मैदान और धार्मिक संरचनाओं का कार्य लगातार जारी है। आयोजन समिति द्वारा जानकारी दी गई कि इस नौ दिवसीय कार्यक्रम में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा,विशाल धार्मिक महायज्ञ मां दुर्गा पूजा-अर्चना विशाल भंडारा लोक-संस्कृति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम,श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की भव्य प्रस्तुति की जाएगी। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-संस्कृति,परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी बनेगा। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति और क्षेत्रीय जनता का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति में कुंवर सिंह पंवार अध्यक्ष,दिनेश पंवार कोषाध्यक्ष,रमेश पंवार मुख्य प्रबंधक,बालम सिंह पंवार उपाध्यक्ष,विद्यादत्त पेटवाल संयोजक,प्रेमदत्त नोटियाल कामरेड संस्थापक विशेष रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त आयोजन में सहयोग करने वालों में जवाहर लाल खत्री महासचिव,हिमांशु अग्रवाल,हरीश पंवार सहसचिव,पवन पंवार (सचिव),दिनेश पंवार (दीनू),कर्ण सिंह पंवार,राजेंद्र कंडारी,विरेद्र रावत (श्यामपुर), मंगल सिंह पंवार,सोहन सिंह पंवार (भराड़ी मां का पश्वा),विनोद डंगवाल (पुजारी एवं व्यवस्थापक), आशु सड़ाना,दिनेश रमोला,प्रमोद डंगवाल,जोत सिंह नेगी,परमवीर पंवार,गणेश रतूड़ी,विनोद पैन्यूली,आनंद सिंह पंवार,बुद्धि सिंह पंवार,राजेंद्र जोशी,गंगा सिंह पंवार,इन्द्रमणी जोशी,भूषण पंवार लसियाल,शंकर मणी लसियाल,हंसा पंवार,बासुदेव कंडारी,प्रियंका पंवार (प्रधान ग्राम सभा घाट) सहित समस्त क्षेत्रवासी और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से सहयोग प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि खेट पर्वत आने वाले समय में उत्तराखण्ड का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार,स्वरोजगार और पर्यटन आधारित आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा इस क्षेत्र को योजनाबद्ध रूप से विकसित किया जाए तो खेट पर्वत भविष्य में उत्तराखण्ड की नई आध्यात्मिक पहचान बन सकता है। आयोजन समिति ने प्रदेश और देशभर के श्रद्धालुओं,पर्यटकों एवं धर्मप्रेमियों से अपील की है कि वे इस पावन धार्मिक आयोजन में सहभागी बनकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को मजबूत बनाने में अपना सहयोग दें। जहां हिमालय की वादियों में गूंजती है मां दुर्गा की महिमा,वहीं खेट पर्वत आज उत्तराखण्ड की आस्था,संस्कृति और अध्यात्म का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है।