गुलदार का कहर-दुधारू भैंस को बनाया निवाला,पीड़ित परिवार पर टूटा आजिविका का संकट

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी टिहरी/घनसाली/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी जनपद के विकास खण्ड भिलंगना अंतर्गत पट्टी ग्यारहगांव की ग्राम पंचायत दोणी वल्ली में गुरुवार को गुलदार के हमले ने एक गरीब परिवार की आजीविका पर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

टिहरी/घनसाली/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी जनपद के विकास खण्ड भिलंगना अंतर्गत पट्टी ग्यारहगांव की ग्राम पंचायत दोणी वल्ली में गुरुवार को गुलदार के हमले ने एक गरीब परिवार की आजीविका पर गहरा आघात पहुंचा दिया। घर के समीप चर रही एक दुधारू भैंस पर घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक हमला कर दिया,जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है,जबकि पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत दोणी वल्ली निवासी विमला देवी पत्नी सोहन सिंह की दुधारू भैंस रोज की तरह घर के नजदीक चर रही थी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया। जब तक आसपास के लोग मौके पर पहुंचते,तब तक भैंस दम तोड़ चुकी थी। घटना से ग्रामीणों में भय व्याप्त है और लोग अपने पशुओं को खुले में चराने से भी डरने लगे हैं। घटना की सूचना मिलते ही भिलंगना वन रेंज के वन कर्मी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मौजूदगी में घटनास्थल का निरीक्षण किया,आवश्यक जांच-पड़ताल की तथा नियमानुसार भैंस के शव का पंचनामा भरकर उसे दफना दिया। वन विभाग ने नियमानुसार मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा भी दिया है। पीड़िता विमला देवी ने नम आंखों से बताया कि यह दुधारू भैंस उनके परिवार की आय का सबसे बड़ा सहारा थी। भैंस के दूध की बिक्री से ही परिवार का भरण-पोषण,बच्चों की पढ़ाई और दैनिक आवश्यकताओं का खर्च चलता था। एक ही झटके में आजीविका का यह प्रमुख साधन समाप्त हो जाने से परिवार गहरे आर्थिक संकट में आ गया है। घटना के बाद ग्राम प्रधान उमराव सिंह राणा,पूर्व प्रधान मानवेन्द्र सिंह राणा,लाल सिंह नेगी सहित अनेक ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को शीघ्र एवं उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे गुलदार के हमलों से पशुपालकों और ग्रामीणों में भय का वातावरण बना हुआ है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जनहानि जैसी गंभीर घटनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाए,गुलदार की गतिविधियों पर निगरानी रखे,प्रभावित गांवों में जागरूकता अभियान चलाए तथा वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित परिवारों को समयबद्ध और पर्याप्त मुआवजा उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन्यजीवों का आतंक इसी तरह बढ़ता रहा तो पशुपालन,जो पर्वतीय क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है,गंभीर संकट में पड़ जाएगा। ऐसे में प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

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