
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी नगर क्षेत्र के वार्ड नंबर-9 स्थित न्यू विकास कॉलोनी (कृषि भवन के समीप) में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से क्षेत्रवासियों के घरों में नलों से काले रंग का दूषित एवं बदबूदार पानी आ रहा है,जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि मजबूरीवश उन्हें यही दूषित पानी घरेलू उपयोग एवं पीने के लिए इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार कई बार संबंधित विभाग को समस्या से अवगत कराया गया,लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। हालात यह हैं कि नलों से साफ पानी की जगह काले रंग का गंदा पानी निकल रहा है,जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों,बुजुर्गों एवं बीमार व्यक्तियों को उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि दूषित पानी के कारण पेट संबंधी बीमारियों और अन्य संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना शासन एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है,लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते उन्हें मूलभूत सुविधा से भी वंचित होना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि कई दिनों से समस्या बनी होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक नहीं आए हैं। वार्डवासियों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि पेयजल लाइन की तत्काल जांच कर दूषित जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही जल की गुणवत्ता की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके। उनका कहना है कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वार्डवासी एकजुट होकर संबंधित विभाग एवं प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने और उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने को विवश होंगे। इस संबंध में क्षेत्र के निवासी अनूप बर्थवाल,रानी बर्थवाल,रिंकी गुसाईं,शकुंतला बर्थवाल,सुशीला रावत,ममता गेरोला,आरती थपलियाल,शिवम बर्थवाल,प्रमोद थपलियाल,आशीष गेरोला,दारा सिंह,संगीता डोभाल,नीलम मेहरा,राजेंद्र रावत,सुरेश नेगी,आकाश गुसाईं,मीना देवी,मिक्की पंत,कल्पना पंत,अजय पंत,शांति देवी सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो वे जनहित में उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि संभावित स्वास्थ्य संकट को देखते हुए इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से दूषित जलापूर्ति बंद कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए,ताकि किसी भी बड़ी जनस्वास्थ्य समस्या से समय रहते बचा जा सके।