कीट और माइट की सही पहचान ही बचाएगी फसल-गलत दवा से बढ़ता नुकसान–डॉ.राजेंद्र कुकसाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। खेती की हरियाली को बचाने की जंग अब केवल मेहनत से नहीं,बल्कि सही पहचान और वैज्ञानिक समझ से भी लड़ी जा रही है। खेतों में दिखने वाले

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। खेती की हरियाली को बचाने की जंग अब केवल मेहनत से नहीं,बल्कि सही पहचान और वैज्ञानिक समझ से भी लड़ी जा रही है। खेतों में दिखने वाले सूक्ष्म हमलावरों-कीट और माइट सूक्ष्म मकड़ी के बीच फर्क न कर पाने की छोटी सी चूक किसानों पर भारी पड़ रही है। गलत दवा के प्रयोग से जहां फसल को अपेक्षित राहत नहीं मिलती,वहीं आर्थिक नुकसान अलग से झेलना पड़ता है। कृषि विशेषज्ञ डॉ.राजेंद्र कुकसाल ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान आकर्षित करते हुए किसानों से सजग रहने की अपील की है। डॉ.कुकसाल के अनुसार किसी भी रासायनिक दवा का प्रयोग करने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि फसल पर हमला कीट कर रहे हैं या माइट,क्योंकि दोनों के नियंत्रण की विधि पूरी तरह अलग होती है। कीट की पहचान और प्रभाव कीटों का शरीर स्पष्ट रूप से तीन भागों-सिर,वक्ष और उदर में विभाजित होता है। इनके पास तीन जोड़ी (कुल 6) पैर होते हैं और अधिकांश कीटों में पंख भी पाए जाते हैं। थ्रिप्स,सफेद मक्खी,जैसिड,एफिड (चेपा) और वीटिल जैसे कीट फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके प्रकोप से मिर्च और अन्य सब्जी फसलों की पत्तियां ऊपर की ओर मुड़कर नाव के आकार की हो जाती हैं,जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। कीट नियंत्रण के उपाय कीटों के नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है,जैसे-मैलेथियॉन,नुवान डाइक्लोर्वोस,साइपरमेथ्रिन,क्लोरपाइरीफास,इमिडाक्लोप्रिड और रोगोर। माइट सूक्ष्म मकड़ी की पहचान और प्रभाव माइट का शरीर एक समान दिखाई देता है और इनमें चार जोड़ी (कुल 8) पैर होते हैं। ये अत्यंत सूक्ष्म होते हैं और प्रायः पत्तियों की निचली सतह पर पाए जाते हैं। लाल माइट इसका प्रमुख उदाहरण है। माइट के प्रकोप से पत्तियां नीचे की ओर मुड़कर छतरी या कप के आकार की हो जाती हैं तथा उनका रंग पीला या भूरा पड़ने लगता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। माइट के नियंत्रण के लिए विशेष माइटनाशी दवाओं का प्रयोग किया जाता है,जैसे-प्रोपरजाइट,फेनपायरोक्सिमेट,स्पाइरोमेसीफेन और डायकोफोल। डॉ.राजेंद्र कुकसाल ने किसानों को स्पष्ट संदेश दिया कि बिना सही पहचान के दवा का प्रयोग करना फसल के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले कीट और माइट के लक्षणों को ध्यान से समझें,उसके बाद ही उचित दवा का चयन करें। सही पहचान,सही दवा और सही समय-इन्हीं तीन मंत्रों से किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और अनावश्यक खर्च से भी बच सकते हैं।

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