
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के पावन आशीर्वाद से संत निरंकारी मिशन की गडोली पौड़ी शाखा में संत निरंकारी महिला समागम का भव्य आयोजन श्रद्धा,भक्ति,आध्यात्मिक चेतना और सेवा-भाव के वातावरण में संपन्न हुआ। समागम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंची महिला संगत एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान सत्संग,आध्यात्मिक विचारों और सेवा-समर्पण के माध्यम से मानव जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया गया। संयोजक स्तरीय संत निरंकारी महिला समागम को संबोधित करते हुए ज्ञानप्रचारिका बहन सविंदर कौर ने कहा कि सतगुरु द्वारा प्रदान किया गया ब्रह्मज्ञान केवल सुनने या सुनाने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसकी वास्तविक सार्थकता तभी है,जब इसे जीवन में उतारा जाए। ज्ञान का प्रभाव मनुष्य के विचारों,व्यवहार,परिवार और दैनिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के रूप में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन के इतिहास में अनेक महान संतों एवं माताओं ने अपने जीवन के माध्यम से सेवा,समर्पण,नम्रता,त्याग और मानवता की प्रेरणा दी है। उनका जीवन आज भी संगत के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। बहन सविंदर कौर ने महिला संगत से आत्ममंथन का आह्वान करते हुए कहा कि यदि कोई बहन सत्संग सुनकर अपने घर लौटती है तो उसके परिवार को उसके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होना चाहिए। उसकी वाणी में मिठास, व्यवहार में नम्रता,मन में संतोष तथा परिवार के प्रति प्रेम और अपनापन बढ़ना ही सत्संग की वास्तविक कमाई है। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रभाव इतना सकारात्मक होना चाहिए कि परिवार के सदस्य स्वयं कहें-आप सत्संग से कुछ अच्छा सीखकर आई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के बावजूद मानसिक शांति और संतोष की तलाश में भटक रहा है। ऐसे समय में निरंकार परमात्मा की पहचान मनुष्य के जीवन को वास्तविक आध्यात्मिक सहारा प्रदान करती है। उन्होंने संगत से जीवन में शिकायतों के स्थान पर शुक्राना,अहंकार के स्थान पर नम्रता तथा स्वार्थ के स्थान पर सेवा और प्रेम को अपनाने का आह्वान किया। ज्ञानप्रचारिका ने कहा कि सतगुरु ने मानव को केवल ब्रह्मज्ञान ही नहीं दिया,बल्कि ऐसी संगत भी प्रदान की है,जहां सेवा,प्रेम,सहयोग और अपनापन जीवन का हिस्सा बनते हैं। संगत का उद्देश्य केवल कार्यक्रमों में उपस्थित होना नहीं,बल्कि एक-दूसरे के जीवन में सकारात्मकता और मानवता का भाव जगाना है। उन्होंने कहा कि संसार के आकर्षण और परिस्थितियों के बीच मनुष्य कई बार अपने मूल उद्देश्य से भटक जाता है,लेकिन सतगुरु का दिया हुआ ज्ञान उसे सही दिशा दिखाता है। परिस्थितियां कैसी भी हों,मनुष्य को ईश्वर का सहारा नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने महिला संगत से आह्वान किया कि वे ज्ञान को अपने आचरण में उतारें, सेवा को जीवन का हिस्सा बनाएं,नम्रता को अपनाएं और मानवता एवं प्रेम को अपने व्यवहार का आधार बनाएं। समागम के दौरान महिला श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न स्थानों से पहुंची महिला संगत ने आध्यात्मिक कार्यक्रम में सहभागिता कर सतगुरु के संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में श्रद्धा,अनुशासन और सेवा-भाव का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में जोनल इंचार्ज,संयोजक,संचालक,सेवादल तथा स्थानीय संगत के महात्माओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सेवादल के स्वयंसेवकों ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। समागम की जानकारी संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच के मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि महिला समागम का उद्देश्य महिलाओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ सेवा,समर्पण,परिवार में प्रेम,सामाजिक सद्भाव और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध कराना है। इस अवसर पर जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह,पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी,सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुंदर लाल मुयाल,संत निरंकारी मिशन पौड़ी के संयोजक नृपेन्द्र तिवारी सहित श्रीनगर निरंकारी मिशन ब्रांच से सुरेश पंत,गुड्डी कंडारी,मुन्नी नेगी,कुसुम पंत,सुनील कुमार,विशेश्वरी बिष्ट सहित बड़ी संख्या में संत महात्मा एवं साध संगत उपस्थित रही। समागम का मूल संदेश यही रहा कि आध्यात्मिक ज्ञान की पहचान केवल शब्दों में नहीं,बल्कि मनुष्य के व्यवहार,सेवा,विनम्रता,प्रेम और मानवता में दिखाई देनी चाहिए।