गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.नागेन्द्र रावत का अंतरराष्ट्रीय विरासत विज्ञान प्रशिक्षण के लिए चयन,वैश्विक शोध जगत में उत्तराखंड का बढ़ा मान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग प्राचीन भारतीय इतिहास,संस्कृति एवं पुरातत्व के सहायक आचार्य डॉ.नागेन्द्र एस.रावत का यूरोप की प्रतिष्ठित एट्रियम अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग प्राचीन भारतीय इतिहास,संस्कृति एवं पुरातत्व के सहायक आचार्य डॉ.नागेन्द्र एस.रावत का यूरोप की प्रतिष्ठित एट्रियम अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण पहुंच योजना के अंतर्गत साइप्रस संस्थान की एंड्रियास पिट्टास कला एवं धरोहर वैज्ञानिक विश्लेषण प्रयोगशालाओं में शोध एवं उन्नत प्रशिक्षण के लिए चयन हुआ है। यह चयन विश्वभर के शोधकर्ताओं के मध्य हुई कठोर प्रतिस्पर्धात्मक वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद हुआ है,जिसे सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण,पुरातत्व तथा विरासत विज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत प्रतिष्ठित उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल डॉ.नागेन्द्र रावत की व्यक्तिगत शोध यात्रा का गौरवपूर्ण पड़ाव है,बल्कि हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखण्ड तथा सम्पूर्ण भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए भी सम्मान और गौरव का विषय है। इससे विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय शोध पहचान को नई मजबूती मिलेगी तथा वैश्विक शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। एट्रियम अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण पहुंच योजना यूरोप की एक प्रतिष्ठित पहल है,जिसका उद्देश्य विश्व के उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक विरासत विज्ञान प्रयोगशालाओं,वैज्ञानिक अनुसंधान अवसंरचना तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ कार्य करने का अवसर उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत चयनित शोधकर्ताओं को ऐतिहासिक स्मारकों,पुरातात्त्विक अवशेषों,प्राचीन निर्माण सामग्री तथा सांस्कृतिक धरोहरों के वैज्ञानिक परीक्षण,संरक्षण,विश्लेषण एवं दस्तावेजीकरण की नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। डॉ.रावत को साइप्रस संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में कार्य करने का अवसर मिलेगा,जहां वे आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से पुरातात्त्विक सामग्रियों,ऐतिहासिक निर्माण अवशेषों तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक विश्लेषण की उन्नत विधियों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। डॉ.नागेन्द्र रावत वर्तमान में भारतीय हिमालय विशेषकर गढ़वाल हिमालय की पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक विरासत,सीमांत क्षेत्रों के पुरातत्व,मध्यकालीन गढ़ों एवं दुर्गों,पारंपरिक कोठा वास्तुकला,डिजिटल सांस्कृतिक धरोहर तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित सांस्कृतिक धरोहर प्रलेखन पर महत्वपूर्ण शोध कार्य कर रहे हैं। उनके शोध कार्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। गढ़वाल हिमालय की ऐतिहासिक धरोहरों के वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान लगातार नई पहचान बना रहा है। डॉ.रावत इससे पूर्व अपने शोध कार्यों के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय इंग्लैंड तथा अरकंसास विश्वविद्यालय अमेरिका की शैक्षणिक यात्राएं भी कर चुके हैं। उनके शोध पत्र कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रकाशन से प्रकाशित हो चुके हैं,जबकि गढ़वाल के प्राचीन गढ़ों एवं दुर्गों पर किए गए उनके शोध को विश्व की अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध पत्रिका नेचर में भी प्रमुखता से स्थान मिल चुका है। यह उपलब्धि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में नई पहचान दिलाने वाली मानी जा रही है। भारतीय हिमालय की धरोहर संरक्षण में मिलेगा नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण डॉ.नागेन्द्र रावत ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें विरासत विज्ञान की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को सीखने तथा उन्हें भारतीय हिमालय की सांस्कृतिक धरोहरों के अध्ययन,संरक्षण एवं वैज्ञानिक विश्लेषण में लागू करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग उत्तराखण्ड तथा सम्पूर्ण भारतीय हिमालय की पुरातात्त्विक धरोहरों के संरक्षण,डिजिटल दस्तावेजीकरण तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को और अधिक सशक्त बनाने में किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर के लिए एट्रियम कार्यक्रम तथा साइप्रस संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह चयन केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं,बल्कि हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय,उत्तराखण्ड और भारतीय शोध समुदाय के लिए भी गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से भविष्य में भारतीय एवं यूरोपीय शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त शोध,साझा प्रकाशनों तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को नई गति मिलेगी। डॉ.रावत की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार,शिक्षकों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा,उत्कृष्ट शोध संस्कृति तथा उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक कार्यों का प्रमाण बताया। शिक्षकों ने कहा कि यह उपलब्धि युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। डॉ.नागेन्द्र रावत का यह चयन इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखण्ड की धरती केवल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक धरोहरों के लिए ही नहीं,बल्कि विश्वस्तरीय शोध प्रतिभाओं के निर्माण के लिए भी पहचानी जा रही है। गढ़वाल हिमालय इस की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...