जन-आंदोलन की बड़ी जीत-देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर पेड़ों की कटाई रुकी,पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में झुकी सरकार

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर दशकों पुराने और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्षों की प्रस्तावित कटाई पर उत्तराखंड सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के निर्णय का सेव हिमालयाज

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर दशकों पुराने और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्षों की प्रस्तावित कटाई पर उत्तराखंड सरकार द्वारा रोक लगाए जाने के निर्णय का सेव हिमालयाज पीपल्स कमेटी ने स्वागत करते हुए इसे जनजागरण,जनसहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। समिति का कहना है कि यह केवल पेड़ों को बचाने की जीत नहीं,बल्कि प्रकृति,पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जीत है। समिति ने इस आंदोलन में शामिल सभी आयु वर्ग के नागरिकों,पर्यावरण प्रेमियों,सामाजिक कार्यकर्ताओं,युवाओं,महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के साहस,धैर्य एवं लोकतांत्रिक संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि यदि जनता एकजुट होकर अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए खड़ी हो जाए,तो बड़े से बड़ा निर्णय भी बदला जा सकता है। समिति ने अपने वक्तव्य में कहा कि सरकार के प्रारंभिक कठोर रुख के बावजूद नागरिकों ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखा। यही जनसंकल्प अंततः पर्यावरण के पक्ष में सकारात्मक निर्णय का कारण बना। समिति के अनुसार यह जीत किसी एक संगठन की नहीं,बल्कि उन सभी जागरूक नागरिकों की है जिन्होंने हिमालय और उसकी हरित धरोहर को बचाने के लिए आवाज उठाई। सेव हिमालयाज पीपल्स कमेटी ने दोहराया कि किसी भी ऐसी विकास परियोजना,जिसका सीधा प्रभाव पर्यावरण,वन संपदा या पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता हो,उसे लागू करने से पहले व्यापक जनसंवाद होना आवश्यक है। समिति का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं,बशर्ते निर्णय वैज्ञानिक अध्ययन,पारदर्शिता और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता के आधार पर लिए जाएं। समिति ने राज्य सरकार से मांग की कि भविष्य में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली किसी भी परियोजना को स्वीकृति देने से पूर्व पर्यावरण विशेषज्ञों,वैज्ञानिकों,स्थानीय नागरिकों,सामाजिक संगठनों तथा जन प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक और अनिवार्य संवाद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए,ताकि विकास योजनाएं जनभावनाओं और पर्यावरणीय संतुलन दोनों के अनुरूप आगे बढ़ सकें। समिति ने उत्तराखंड की जनता से भी सतर्क और जागरूक बने रहने का आह्वान करते हुए कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक पहचान नहीं,बल्कि राज्य की जीवनरेखा है। इसके जंगल,नदियां और जैव विविधता हमारी साझा धरोहर हैं,जिनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। अपने संदेश के अंत में समिति ने कहा कि हमारा पर्यावरण ही हमारा अस्तित्व है और हमारी एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि भविष्य में भी जनता इसी प्रकार सजग और संगठित रहेगी,तो उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

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