तेगड़-लोस्तु बडियारगढ़ राजकीय महाविद्यालय में गूंजा गुरु गौरव-डॉ.राधाकृष्णन को नमन,शिक्षकों ने संजोया राष्ट्र निर्माण का संकल्प

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय महाविद्यालय तेगड़-लोस्तु बडियारगढ़ जनपद टिहरी गढ़वाल में शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के महान शिक्षाविद्,दार्शनिक एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक स्मरण

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय महाविद्यालय तेगड़-लोस्तु बडियारगढ़ जनपद टिहरी गढ़वाल में शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के महान शिक्षाविद्,दार्शनिक एवं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ.सुबोध कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षक के महत्व,उसकी सामाजिक भूमिका तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। महाविद्यालय के प्राध्यापकों,कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। इस अवसर पर डॉ.सृजना राणा ने डॉ.राधाकृष्णन के जीवन एवं दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक महान शिक्षक और दार्शनिक ही नहीं,बल्कि भारतीय शिक्षा परंपरा के ऐसे पुरोधा थे,जिन्होंने शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और समाज के उत्थान का माध्यम माना। उनका जीवन आज भी शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ.दिनेश सिंह नेगी ने शिक्षक को राष्ट्र का वास्तविक निर्माता बताते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान नहीं देता,बल्कि उनके चरित्र,संस्कार,विचार और व्यक्तित्व का निर्माण भी करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की आधारशिला है और एक सशक्त,संस्कारित एवं जागरूक राष्ट्र के निर्माण में उसकी भूमिका सर्वोपरि है। डॉ.राजेश भट्ट ने शिक्षक दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में पहला शिक्षक दिवस 5 सितंबर 1962 को मनाया गया था। उन्होंने बताया कि डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शिष्यों एवं प्रशंसकों ने जब उनके जन्मदिन को मनाने की अनुमति मांगी,तो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को देशभर के शिक्षकों के सम्मान में शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया। उनके इसी विचार के बाद प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई,जो आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय और तकनीकी युग में शिक्षा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है,बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों,नैतिकता,अनुशासन,वैज्ञानिक दृष्टिकोण,सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करना भी है। शिक्षक अपने ज्ञान और संस्कारों से विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने के साथ ही समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार करता है। प्रभारी प्राचार्य डॉ.सुबोध कुमार ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षण कार्य केवल एक पेशा नहीं,बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने डॉ.राधाकृष्णन के आदर्शों को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता प्रकट की। विद्यार्थियों ने कहा कि शिक्षक उनके जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए उन्हें लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक लक्ष्मण नेगी सहित समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित करते हुए शिक्षा और शिक्षक के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक मजबूत किया।

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