17.800 फीट की ऊंचाई पर गूंजा कविता का स्वर-देवताल में हिमालय की गोद में सजा अद्भुत कवि संगम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की दुर्गम एवं रोमांचकारी वादियों में जब बर्फ की सफेद चादर बिछी हो,तेज हिमालयी शीतलहर के बीच प्रकृति अपने रौद्र और दिव्य दोनों रूपों का दर्शन

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की दुर्गम एवं रोमांचकारी वादियों में जब बर्फ की सफेद चादर बिछी हो,तेज हिमालयी शीतलहर के बीच प्रकृति अपने रौद्र और दिव्य दोनों रूपों का दर्शन करा रही हो,ऐसे वातावरण में साहित्य,संस्कृति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। समुद्र तल से करीब 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल में साहित्यकारों,पत्रकारों और कवियों का अद्भुत जमावड़ा हुआ,जहां हिमालय की चोटियों के बीच कविता,संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के स्वर गूंजे। इस विशेष साहित्यिक एवं आध्यात्मिक यात्रा में देहरादून दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ.सुभाष थलेड़ी,गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अमरेंद्र राय,श्रीनगर के कवि डॉ.राजेश जैन,गढ़कवि देवेंद्र उनियाल,अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ कर चुकीं माधुरी नैथानी,राजेंद्र प्रसाद कपरुवाण,जोशीमठ क्षेत्र के इंटरनेट एवं वाई-फाई सेवा से जुड़े राजेश नंबूरी,श्रीकोट गंगानाली व्यापार संगठन के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध रोटेरियन नरेश नौटियाल,रक्षा उनियाल,रेणु नौटियाल,पथारोही संजय उनियाल,विपिन रावत,सत्यपाल रावत सहित अनेक साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देहरादून दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ.सुभाष थलेड़ी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में उत्तरदायित्वधारी राज्य मंत्री रामशरण गौड़ अपनी धर्मपत्नी लाजवंती गौड़ के साथ उपस्थित रहे। अत्यधिक ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम ने साहित्य प्रेमियों के लिए एक अलग ही अनुभव प्रस्तुत किया। लगातार हो रही बर्फबारी और तेज गति से चल रही हिमालयी शीतलहर के बावजूद श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। पंडित राजेंद्र प्रसाद कपरुवाण एवं पंडित देवेंद्र उनियाल ने देवताल के इस हिमाच्छादित उच्चांश में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं हवन संपन्न कराया। वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार और हिमालय की नीरवता का अद्भुत समागम देखने को मिला। इस अवसर पर डॉ.सुभाष थलेड़ी ने उत्तराखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व.मोहन सिंह ग्रामवासी द्वारा प्रारंभ की गई देवताल-माणा पास धार्मिक यात्रा की उपयोगिता और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा मार्ग हिमालय की आध्यात्मिक विरासत,प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति को देश-दुनिया के सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यात्रा के दौरान संध्या बेला में श्री बद्रीनाथ धाम में भी साहित्यिक वातावरण देखने को मिला। देवेन्द्र राय की अध्यक्षता में आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिमालय,प्रकृति,अध्यात्म,संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को शब्द दिए। कवि गोष्ठी में अनेक अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य सम्मेलनों में काव्य पाठ कर चुकीं माधुरी नैथानी,डॉ.राजेश जैन,रक्षा उनियाल, गढ़कवि देवेंद्र उनियाल एवं नीरज नैथानी ने अपनी कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। कविताओं की प्रस्तुति से बदरीनाथ धाम का वातावरण साहित्यिक रस से सराबोर हो उठा। साहित्यिक एवं आध्यात्मिक यात्रा के दौरान दल ने उत्तराखंड के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों के दर्शन भी किए। यात्रा में भविष्य बद्री,योग बद्री,वृद्ध बद्री,श्री बद्रीनाथ धाम एवं श्री नृसिंह मंदिर के दर्शन किए गए। इसके साथ ही यात्रियों ने वसुधारा का रोमांचकारी पथारोहण भी किया। कठिन हिमालयी परिस्थितियों के बीच यह यात्रा प्रतिभागियों के लिए आध्यात्मिक अनुभूति के साथ-साथ रोमांच और प्रकृति के निकट पहुंचने का यादगार अवसर बनी। देवताल की बर्फीली ऊंचाइयों पर साहित्य का यह संगम केवल एक कवि गोष्ठी नहीं,बल्कि हिमालय की प्रकृति,अध्यात्म,संस्कृति और हिंदी साहित्य के बीच जीवंत संवाद का ऐसा अवसर बना,जिसने सहभागी साहित्यकारों और यात्रियों के मन में अविस्मरणीय छाप छोड़ी।

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