धाती डागर में वित्तीय साक्षरता की अलख-82 ग्रामीणों के बने आभा हेल्थ कार्ड,साइबर ठगी से बचाव के बताए गुर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। डिजिटल युग में जहां बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं आमजन के लिए पहले से कहीं अधिक सरल और सुलभ हुई हैं,वहीं साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं भी एक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। डिजिटल युग में जहां बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं आमजन के लिए पहले से कहीं अधिक सरल और सुलभ हुई हैं,वहीं साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं भी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक करने और उन्हें ऑनलाइन ठगी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्रिसिल फाउंडेशन के सीएफएल प्रोजेक्ट हिंडोलाखाल की ओर से विकासखंड कीर्तिनगर की ग्राम पंचायत थाती डागर में वित्तीय साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम एवं आभा हेल्थ कार्ड शिविर का आयोजन किया गया। ग्राम पंचायत के पंचायती भवन में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। शिविर के दौरान कुल 82 ग्रामीणों के आभा हेल्थ कार्ड बनाए गए। इस पहल से ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने के साथ-साथ वित्तीय जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किया गया। कार्यक्रम में सीएफएल हिंडोलाखाल के एरिया मैनेजर अंकित मिश्रा एवं फील्ड कोऑर्डिनेटर सरिता देवी ने ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं के सुरक्षित उपयोग,डिजिटल भुगतान,यूपीआई के माध्यम से लेन-देन,बचत की आदत विकसित करने तथा वित्तीय लेन-देन में सावधानी बरतने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाया जा सकता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही व्यक्ति को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है। साइबर ठग विभिन्न तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर गोपनीय जानकारी मांगते हैं तो कभी केवाईसी अपडेट,इनाम,लिंक अथवा ओटीपी के नाम पर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने ग्रामीणों को विशेष रूप से आगाह किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी,एटीएम पिन,ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें तथा किसी के कहने पर मोबाइल में संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक अथवा कोई भी अधिकृत संस्था फोन पर ओटीपी या गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहती। प्रशिक्षकों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे बिना देरी किए अपने बैंक को सूचना देनी चाहिए तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से आर्थिक नुकसान को रोकने और ठगी की गई धनराशि की वापसी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इस अवसर पर ग्रामीणों को केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना,प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना की पात्रता,लाभ और उपयोगिता समझाते हुए वक्ताओं ने ग्रामीणों से इन योजनाओं से जुड़कर अपने परिवार के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं है,बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय,बचत,बीमा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों की विशेष आवश्यकता है,ताकि गांव का प्रत्येक परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सके और डिजिटल ठगी से स्वयं को सुरक्षित रख सके। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं,वित्तीय सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने भी शिविर को उपयोगी बताते हुए इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई। इस मौके पर ग्राम प्रधान संजय प्रसाद भट्ट सहित अन्य ग्रामीण एवं संबंधित लोग मौजूद रहे।

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