नाभि-कमल से सृष्टि विस्तार और वारह अवतार तक गूंजा कूर्म महापुराण का दिव्य आख्यान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। श्रीक्षेत्र अलकनंदा की तलहटी पर बसा श्रीनगर इन दिनों धर्म,अध्यात्म और सनातन संस्कृति की दिव्य आभा से आलोकित है। श्रीनगर के गणेश मंदिर में आयोजित श्री कूर्म

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। श्रीक्षेत्र अलकनंदा की तलहटी पर बसा श्रीनगर इन दिनों धर्म,अध्यात्म और सनातन संस्कृति की दिव्य आभा से आलोकित है। श्रीनगर के गणेश मंदिर में आयोजित श्री कूर्म महापुराण कथा के तृतीय दिवस भगवान विष्णु की महिमा,सृष्टि के आदि स्वरूप,भगवान ब्रह्मा के प्राकट्य,स्वयंभुव मनु एवं शतरूपा द्वारा सृष्टि विस्तार तथा भगवान विष्णु के वाराह अवतार का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन किया गया। कथा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को सृष्टि के रहस्यमय उद्गम और सनातन धर्म की गहन आध्यात्मिक परंपरा से परिचित कराया। कथा व्यास आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने कूर्म महापुराण के दिव्य प्रसंगों का रसपूर्ण व्याख्यान करते हुए बताया कि सनातन परंपरा में सृष्टि की उत्पत्ति को भगवान की दिव्य लीला के रूप में देखा गया है। भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल से भगवान ब्रह्मा का प्राकट्य हुआ और ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना का दायित्व संभाला। इसके पश्चात मानस पुत्रों का अवतरण हुआ और सृष्टि के क्रमिक विस्तार की दिव्य गाथा आगे बढ़ी। कथा में भगवान ब्रह्मा से स्वयंभुव मनु और शतरूपा के माध्यम से सृष्टि के विस्तार का प्रसंग विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कथावाचक ने बताया कि स्वयंभुव मनु और शतरूपा को मानव सृष्टि के विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। उनके माध्यम से सृष्टि के विकास और मानव जीवन की सनातन परंपरा को आगे बढ़ने का प्रसंग कूर्म महापुराण में अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश प्रदान करता है। कथा के दौरान भगवान विष्णु के वाराह अवतार का भी विधिवत एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान विष्णु द्वारा वाराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार करने की दिव्य कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान के विभिन्न अवतार धर्म की स्थापना,सृष्टि के संरक्षण और लोककल्याण की सनातन अवधारणा को अभिव्यक्त करते हैं। वाराह अवतार का प्रसंग यह संदेश देता है कि जब-जब सृष्टि और धर्म पर संकट आता है,तब ईश्वर किसी न किसी स्वरूप में लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा। श्रद्धालु बड़ी संख्या में कथा श्रवण के लिए पहुंचे और भगवान विष्णु,भगवान ब्रह्मा तथा सनातन धर्म के दिव्य आख्यानों का श्रवण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। कथा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी माध्यम बन रही है। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय सनातन परंपरा,पुराणों,धार्मिक आख्यानों और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है। गणेश मंदिर में चल रही इस कथा में व्यासपीठ पर आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल के साथ विद्वान आचार्य पंडित मनीष डोभाल,वीरेन्द्र दत्त घिल्डियाल,संदीप पुरोहित,मनोज बंगवाल,संदीप उनियाल,भुवनेश भट्ट,नवीन शैव एवं चन्द्र प्रकाश नैथानी सहित आयोजन मंडल के सहयोगी उपस्थित रहे। गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी रामकृष्ण पाण्डे,प्रभात पाण्डे तथा आज के मुख्य यजमान अनुज रावत ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी भोपाल चौधरी,मुकेश जोशी,कुशलानंद भट्ट,सुधीर बिष्ट,राघव जोशी,पवन बंसल,सुरेंद्र चौहान,हिमांशु अग्रवाल,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,रणजीत सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी मौजूद रहे। श्रीक्षेत्र अलकनंदा की तलहटी में बसे श्रीनगर में आयोजित यह कूर्म महापुराण कथा धार्मिक आस्था के साथ-साथ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत,सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दे रही है। कथा के प्रत्येक प्रसंग में धर्म,कर्तव्य,शलोककल्याण और मानव जीवन के उद्देश्य का मर्म समाहित है। मंदिर परिसर में गूंज रहे वेद मंत्र,पुराणों के दिव्य आख्यान और भगवान के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

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