
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। जब किसी व्यक्ति का सार्वजनिक जीवन संघर्ष,सादगी,जनसेवा और राष्ट्र समर्पण का पर्याय बन जाता है, तब मिलने वाला सम्मान केवल व्यक्ति विशेष का नहीं,बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की अस्मिता का सम्मान बन जाता है। इसी भावना के साथ हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में मंगलवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र एवं गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत किए जाने के उपलक्ष्य में भव्य नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में जनप्रतिनिधियों,शिक्षाविदों,सामाजिक संगठनों,बुद्धिजीवियों,विद्यार्थियों तथा नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगत सिंह कोश्यारी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और सम्मान के भाव से गुंजायमान रहा। अपने संबोधन में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं,बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की जनता,उसकी संस्कृति,संघर्षशीलता और मूल्यों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस अवसर को उनके अभिनंदन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए,बल्कि इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए,जिनके नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहा है। कोश्यारी ने अपने राजनीतिक जीवन के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2013 में राजनीति से संन्यास लेने के बाद जब उनके नाम पर राज्यपाल पद के लिए विचार हुआ,तब तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में सम्मान और संवाद की परंपरा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन का विशेष उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा। कोश्यारी ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार ग्रामीण समाज और युवाओं के संयुक्त प्रयासों से यह संकल्प अवश्य साकार होगा। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड के गांवों में स्वरोजगार,फल उत्पादन,सब्जी उत्पादन तथा स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखा जा रहा है। सरकारी योजनाओं और बेहतर अवसरों के कारण पलायन की गति में कमी आई है तथा लोग पुनः अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया कि वे चाहे देश या विदेश के किसी भी हिस्से में रहें,अपनी जड़ों और मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं की पहचान केवल उनकी सफलता से नहीं,बल्कि उनके संस्कारों,कार्यशैली और समाज के प्रति जिम्मेदारी से भी होनी चाहिए। सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखते हुए कोश्यारी ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव आज भी समाज के समक्ष एक गंभीर चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि अपने पैतृक गांव में सामाजिक एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित सहभोज कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता ही सशक्त और विकसित उत्तराखंड की आधारशिला बन सकती है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने भगत सिंह कोश्यारी के सार्वजनिक जीवन,सामाजिक योगदान और उत्तराखंड के विकास में निभाई गई भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष,सादगी,ईमानदारी और जनसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पद्मभूषण सम्मान उनके दशकों के समर्पित सार्वजनिक जीवन का राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मान है,जो पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी भारतीय लोकतंत्र में नैतिक राजनीति,सादगी और जनहित के मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज जब राजनीति में आदर्शों और मूल्यों की चर्चा होती है,तब कोश्यारी का व्यक्तित्व प्रेरणा स्रोत के रूप में सामने आता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की एक वर्ष की उपलब्धियों का भी विस्तृत उल्लेख करते हुए शिक्षा,शोध और नवाचार के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग के निदेशक प्रो.पी.बी.सुब्रमण्यम,गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी के निदेशक प्रो.विजय बंगा,राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य प्रो.आशुतोष सयाना,गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी,एनआईटी उत्तराखंड के कुलसचिव डॉ.हरि मौल आजाद,अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं,अभिनंदन समिति के अध्यक्ष प्रो.धन सिंह बिष्ट,प्रो.एम.एस.पंवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक,शिक्षाविद एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। समारोह केवल एक सम्मान कार्यक्रम नहीं रहा,बल्कि उत्तराखंड की विकास यात्रा,सामाजिक समरसता,युवा शक्ति और जनसेवा के मूल्यों पर केंद्रित एक प्रेरक संवाद के रूप में भी यादगार बन गया।