
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच पशुपालन लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है। अब सरकारी योजनाओं के सहयोग से यही परंपरागत गतिविधि ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बनती जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार और आय का सशक्त माध्यम बनाने के संकल्प के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं का जिले के 1,726 ग्रामीणों को लाभ मिला है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इन योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को कुल 8 करोड़ 64 लाख 90 हजार 506 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को गौपालन,बकरी पालन,मुर्गी पालन सहित विभिन्न पशुपालन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनकी आय के साधनों को मजबूत करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि विभाग का विशेष फोकस ग्रामीण युवाओं,महिलाओं और पात्र परिवारों को पशुपालन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने पर है। योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयों के संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गौपालन योजना के तहत 361 लाभार्थियों को 1.30 करोड़ रुपये,सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना में 162 लाभार्थियों को 1.02 करोड़ रुपये तथा एससीपी बकरी पालन योजना में 241 लाभार्थियों को 1.52 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। वहीं महिला बकरी पालन योजना के तहत 82 लाभार्थियों को 28.70 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत 305 लाभार्थियों को 1.92 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। राज्य सेक्टर के अंतर्गत गौपालन,बकरी पालन,महिला बकरी पालन,मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन,गोट वैली और ब्रायलर फार्म सहित विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को पशुपालन इकाइयां स्थापित करने तथा दूध,मांस और अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक पात्र ग्रामीण परिवारों,महिलाओं और युवाओं को इन योजनाओं से जोड़कर उन्हें स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए विभागीय स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन को बढ़ावा मिलने से जहां ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी,वहीं दुग्ध,मांस और अंडा उत्पादन में वृद्धि के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। सरकारी सहायता और ग्रामीणों की मेहनत का यह मेल पहाड़ में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहा है।