
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
टिहरी/पौखाल/श्रीनगर गढ़वाल। पुस्तकें केवल ज्ञान का भंडार ही नहीं,बल्कि विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति,जिज्ञासा और व्यक्तित्व को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम भी हैं। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय पौखाल टिहरी गढ़वाल में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत शुक्रवार को पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों की ज्ञानवर्धक पुस्तकों को देखकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया। छात्र-छात्राओं ने अपनी रुचि के अनुरूप पुस्तकों का अवलोकन किया और उनके विषय-वस्तु के बारे में जानकारी हासिल की। पुस्तक प्रदर्शनी का शुभारंभ विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य मोहित कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में सजाई गई विभिन्न पुस्तकों का उत्सुकता के साथ अवलोकन किया। विद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष वी.डी.शर्मा की देखरेख में आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को पुस्तकों की उपयोगिता,विषय-वस्तु और अध्ययन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ज्ञान के विभिन्न विषयों से रूबरू हुए विद्यार्थी प्रदर्शनी में साहित्य,इतिहास,विज्ञान,सामान्य ज्ञान सहित विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। विद्यार्थियों ने पुस्तकों के पन्ने पलटते हुए उनमें उपलब्ध ज्ञान एवं रोचक तथ्यों को समझने में विशेष रुचि दिखाई। कई विद्यार्थियों ने अपनी पसंद की पुस्तकों के बारे में शिक्षकों से जानकारी ली और नियमित अध्ययन के लिए पुस्तकें पढ़ने की इच्छा भी व्यक्त की। विद्यालय प्रबंधन का कहना रहा कि वर्तमान डिजिटल दौर में विद्यार्थियों को पुस्तकों से जोड़ना और उनमें नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। पुस्तकें विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से बाहर की दुनिया से परिचित कराने के साथ-साथ उनकी भाषा,अभिव्यक्ति,तर्कशक्ति और रचनात्मक क्षमता को भी विकसित करती हैं। प्रभारी प्राचार्य मोहित कुमार ने कहा कि पुस्तकें विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तक प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों की पुस्तकों से परिचित कराने के साथ उनमें पढ़ने की आदत विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नियमित पुस्तक अध्ययन से बच्चों की जिज्ञासा बढ़ती है और उनकी रचनात्मक सोच को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ ज्ञानवर्धक एवं साहित्यिक पुस्तकों का भी नियमित अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि पुस्तकें विद्यार्थियों की सोच का दायरा विस्तृत करती हैं और उन्हें जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को समझने की दृष्टि प्रदान करती हैं। हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य एवं अन्य ज्ञानवर्धक पुस्तकों के प्रति आकर्षित करने का कार्य किया। विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच पुस्तकों के महत्व तथा अध्ययन की उपयोगिता को लेकर सकारात्मक वातावरण देखने को मिला। विद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष वी.डी.शर्मा ने विद्यार्थियों को पुस्तकालय के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का ऐसा केंद्र है,जहां उन्हें अपनी रुचि के अनुरूप अनेक विषयों की पुस्तकें पढ़ने का अवसर मिलता है। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं सत्येंद्र सैनी,अनिल कुमार रावत,के.के.यादव,देवेंद्र सिंह रावत,लखविंदर सिंह,लोकेश चोपड़ा,आलोक यादव,जया सुंदरियाल,नेहा कुमारी,रेनू,प्रिया सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन कर कार्यक्रम का लाभ उठाया। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में संपन्न हुआ।