बच्चों को मिला सुरक्षा का कवच-पाॅक्सो एक्ट से गुड़ टच-बैड टच तक बताए अधिकार,मिशन शक्ति ने जगाई जागरुकता की अलख

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों को उनके अधिकारों,सुरक्षा और किसी भी प्रकार के शोषण अथवा हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जागरूक करने की दिशा में जिला प्रशासन एवं महिला

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों को उनके अधिकारों,सुरक्षा और किसी भी प्रकार के शोषण अथवा हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जागरूक करने की दिशा में जिला प्रशासन एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई। विकासखंड कल्जीखाल के राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बड़कोट में मिशन शक्ति के तहत एक दिवसीय प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को घरेलू हिंसा,पॉक्सो एक्ट,बाल संरक्षण,महिला हेल्पलाइन 181,चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा मिशन शक्ति वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं और कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें यह समझाना रहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा,दुर्व्यवहार,उत्पीड़न अथवा असुरक्षित स्थिति का सामना होने पर चुप रहने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति अथवा संबंधित सहायता तंत्र तक अपनी बात पहुंचाना जरूरी है। मिशन शक्ति वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासिका लक्ष्मी रावत ने छात्र-छात्राओं को बच्चों की सुरक्षा एवं अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने घरेलू हिंसा और बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों से संरक्षण के लिए बनाए गए पॉक्सो एक्ट के बारे में सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार या हिंसा सामान्य बात नहीं है और ऐसी परिस्थितियों को छिपाने के बजाय तत्काल इसकी जानकारी किसी भरोसेमंद अभिभावक,शिक्षक या संबंधित सहायता तंत्र को दी जानी चाहिए। उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि आवश्यकता पड़ने पर सहायता और शिकायत के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान बच्चों को गुड टच और बैड टच के संबंध में विशेष रूप से जागरूक किया गया। बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार या स्पर्श उन्हें असहज अथवा असुरक्षित महसूस कराता है तो ऐसी स्थिति को नजर-अंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को प्रेरित किया गया कि किसी भी संदिग्ध या असहज परिस्थिति में तत्काल अपने माता-पिता,अभिभावक,शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर संबंधित हेल्पलाइन की सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। कार्यशाला में महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 सहित मिशन शक्ति वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से उपलब्ध सहायता एवं सेवाओं की जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि कठिन परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के लिए विभिन्न सरकारी तंत्र उपलब्ध हैं और इनका उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति को आवश्यक सहयोग,सुरक्षा एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। कार्यशाला में बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें अपने आसपास घटने वाली ऐसी घटनाओं के प्रति भी सजग रहने को कहा गया,जिनमें किसी बच्चे अथवा महिला के अधिकारों का हनन हो रहा हो। इस दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्य आशा देवी,सहायक अध्यापक रोशन सिंह रावत,सरित रावत सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यशाला के माध्यम से बच्चों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ ही उन्हें यह संदेश दिया गया कि सुरक्षा केवल बड़ों की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से बच्चे भी अपनी सुरक्षा के लिए सजग और सक्षम बन सकते हैं।

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