
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री,पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर बार एसोसिएशन श्रीनगर में गहरा शोक व्याप्त है। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी एवं बार एसोसिएशन श्रीनगर के संरक्षक अनूप पांथरी सहित अधिवक्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को उत्तराखंड और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। संरक्षक अनूप पांथरी ने अपने शोक संदेश में कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, जनसेवा और ईमानदार राजनीति के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा की और राजनीति में आने के बाद उत्तराखंड के विकास को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में खंडूड़ी की ईमानदारी,सख्त प्रशासनिक शैली और जनता के प्रति जवाबदेही सदैव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उनका जाना केवल एक नेता का निधन नहीं,बल्कि उत्तराखंड में सुशासन और नैतिक राजनीति के एक युग का अंत है। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन सिंह भंडारी ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि खंडूरी का जीवन अनुशासन,राष्ट्रभक्ति,पारदर्शिता और जनकल्याण का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने कहा कि सेना से लेकर राजनीति तक हर क्षेत्र में उन्होंने उच्च आदर्श स्थापित किए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की मजबूत नींव रखने में खंडूड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके द्वारा लिए गए दूरदर्शी निर्णय आज भी प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जिस ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया,वह आज भी जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अनुकरणीय है। अधिवक्ताओं ने कहा कि खंडूड़ी सादगी,स्पष्टवादिता और जनहितकारी सोच के प्रतीक थे। उन्होंने हमेशा राजनीति को सेवा का माध्यम माना और जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बार एसोसिएशन श्रीनगर ने शोक संतप्त परिवार,शुभचिंतकों एवं समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा परिजनों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। शोक व्यक्त करने वालों में प्रमेश चंद्र जोशी,कृष्णानंद मैठाणी,दीपक भंडारी,महेंद्र पाल सिंह रावत,भूपेंद्र पुंडीर,सुबोध भट्ट,प्रदीप मैठाणी,ब्रह्मानंद भट्ट,विवेक जोशी,विकास पंत,परमानंद मैठाणी,देवी प्रसाद खरे,सुनीता भंडारी,आर.पी.थपलियाल,सुरेंद्र सिंह रौथान,विकास कठैत,सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला,ओम प्रकाश मैठाणी,बलबीर सिंह रौतेला,राजेश जैन,रतन सिंह बिष्ट,गौरव उपाध्याय सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे।