बेस अस्पताल में जीवन की जीत-सर्पदंश के बाद गंभीर बच्ची को मिला नया जीवन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं,लेकिन हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय श्रीनगर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समर्पित

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं,लेकिन हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय श्रीनगर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समर्पित चिकित्सकीय टीम,आधुनिक उपचार और समय पर उपचार मिलने पर गंभीर से गंभीर मरीज को भी नया जीवन दिया जा सकता है। जहरीले सांप के डंसने के बाद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही 12 वर्षीय बालिका प्रतिज्ञा को चिकित्सकों ने 12 दिनों की अथक मेहनत,अत्याधुनिक उपचार और सतत निगरानी के बाद पूरी तरह सुरक्षित कर नया जीवन प्रदान किया। यह सफलता न केवल बेस अस्पताल की चिकित्सा क्षमता का प्रमाण है,बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी मिसाल भी बन गई है। रुद्रप्रयाग जनपद की बच्छणस्यूं पट्टी के दूरस्थ ग्राम भराणसैंण निवासी विक्रम सिंह और सरिता देवी की 12 वर्षीय पुत्री प्रतिज्ञा 17 जून को अपने घर के समीप घास काट रही थी। इसी दौरान दीवार में छिपे एक जहरीले सांप ने उसके हाथ पर डंस लिया। अचानक हुए इस हादसे से बालिका की चीख सुनकर परिजन दौड़े और बिना समय गंवाए उसे सीधे हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय श्रीनगर लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने तत्काल उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बाल रोग विभाग में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.सी.एम.शर्मा के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया। उपचार के दौरान जांच में सामने आया कि सांप का विष पूरे शरीर में तेजी से फैल चुका था,जिससे बालिका को डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (DIC) जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति हो गई थी। इस अवस्था में शरीर की रक्त जमने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो जाती है और मरीज के शरीर के विभिन्न हिस्सों से अनियंत्रित रक्तस्राव होने लगता है। प्रतिज्ञा की नाक सहित शरीर के अन्य हिस्सों से भी रक्तस्राव शुरू हो गया था,जिससे उसकी जान पर गंभीर संकट मंडराने लगा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए चिकित्सकीय टीम ने युद्धस्तर पर उपचार किया। उपचार के दौरान उसे 40 एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन,17 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) तथा 4 यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाया गया। ब्लड सेंटर द्वारा समय पर आवश्यक रक्त अवयव उपलब्ध कराए जाने से उपचार में महत्वपूर्ण सफलता मिली। लगातार चिकित्सकीय निगरानी, दवाओं की सटीक मात्रा और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों ने बालिका की बिगड़ती हालत को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई। इसी बीच सांप के काटे गए हाथ में तेजी से सूजन बढ़ने लगी। स्थिति गंभीर होती देख सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ.लक्ष्मण यादव ने तत्काल आवश्यक शल्य प्रक्रिया (चीरा) कर प्रभावित हिस्से का दबाव कम किया,जिससे सूजन नियंत्रित हुई और मरीज को राहत मिली। इस त्वरित निर्णय ने भी उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लगातार 12 दिनों तक चले गहन उपचार,चौबीसों घंटे निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बाद प्रतिज्ञा की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। अंततः चिकित्सकों ने उसे पूरी तरह खतरे से बाहर निकाल लिया। डॉक्टरों का कहना है कि यदि मरीज को अस्पताल लाने में थोड़ी भी देरी होती, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी। समय पर उपचार ही उसकी जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी वजह बना। इस चुनौतीपूर्ण उपचार में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ.अजय गोस्वामी,जूनियर रेजिडेंट डॉ.ज्योति,डॉ.दीपांशु,डॉ.आकाश,डॉ.रोहित एवं डॉ.अभिलाषा के साथ नर्सिंग अधिकारियों,ब्लड सेंटर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई। चिकित्सकों की सामूहिक कार्यशैली और बेहतर समन्वय ने इस जटिल मामले को सफलता की मिसाल बना दिया। डॉक्टरों ने हमारी बेटी को दूसरा जीवन दिया,घर में फिर लौटी खुशियां अपनी बेटी को स्वस्थ देखकर पिता विक्रम सिंह और माता सरिता देवी की आंखें खुशी से भर आईं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिस समय उनकी बेटी की हालत लगातार बिगड़ रही थी,उस समय पूरा परिवार गहरे सदमे में था और उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं। लेकिन बेस अस्पताल के डॉक्टरों ने दिन-रात अथक परिश्रम,समर्पण और उत्कृष्ट चिकित्सा के दम पर उनकी बेटी को नया जीवन दे दिया। परिजनों ने बताया कि उनके परिवार में 15 वर्षीय पुत्र और 12 वर्षीय पुत्री प्रतिज्ञा है। बेटी के स्वस्थ होकर घर लौटने से पूरे परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। उन्होंने बाल रोग विभाग,सर्जरी विभाग,ब्लड सेंटर,नर्सिंग स्टाफ तथा उपचार में जुटे सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही उत्तराखंड सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें समय पर उत्कृष्ट और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया। यह घटना केवल एक बालिका की जिंदगी बचाने की कहानी नहीं,बल्कि यह विश्वास भी जगाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित सरकारी अस्पतालों में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता,आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और समर्पित टीमवर्क के बल पर गंभीर से गंभीर मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय की यह सफलता निश्चित रूप से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि मानी जाएगी।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...