
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विकासखंड कोट में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत एक दिवसीय वित्तीय समावेशन अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं,बीमा योजनाओं,ऋण प्रबंधन,वित्तीय साक्षरता और सरकार की विभिन्न आर्थिक योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी अमित बिजल्वाण ने की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केवल स्वरोजगार से जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय योजनाओं की सही जानकारी देना भी जरूरी है। वित्तीय जागरूकता से महिलाएं अपनी बचत का बेहतर प्रबंधन करने के साथ सरकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकती हैं। कार्यशाला में ग्रामीण वित्त समन्वयक धनंजय प्रसाद भट्ट ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित वित्तीय समावेशन से संबंधित विभिन्न योजनाओं और घटकों की जानकारी दी। उन्होंने सक्षम केंद्र,लखपति दीदी योजना,बैंकिंग सेवाएं,स्वयं सहायता समूहों की बैंक से संबद्धता,ऋण प्रबंधन और वित्तीय साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से कहा कि बैंकिंग सेवाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उन्हें अपने बैंक खातों,बचत,ऋण,ब्याज,किश्त और अन्य वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। उन्होंने समूहों को बैंक से जोड़कर नियमित वित्तीय गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। कार्यशाला में भारतीय जीवन बीमा निगम के प्रतिनिधि ने बीमा सखी की भूमिका तथा विभिन्न बीमा योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवारों के लिए बीमा केवल आर्थिक सुरक्षा का माध्यम ही नहीं,बल्कि भविष्य की अनिश्चित परिस्थितियों में परिवार को वित्तीय संकट से बचाने का महत्वपूर्ण साधन भी है। इस दौरान बैंकिंग संवाददाता सखी,स्वयं सहायता समूह-बैंक संबद्धता,गैर-निष्पादित परिसंपत्ति,सामुदायिक बैंकिंग एवं ऋण प्रबंधन बैठक सहित वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला में महिलाओं को बढ़ते साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को लेकर भी जागरूक किया गया। प्रतिभागियों को बैंक खातों,एटीएम,बैंकिंग सेवाओं और डिजिटल लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने की जानकारी दी गई। महिलाओं को सलाह दी गई कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी,पासवर्ड,गोपनीय बैंकिंग जानकारी अथवा अन्य संवेदनशील विवरण साझा न करें और संदिग्ध संदेशों,फोन कॉल या वित्तीय लेन-देन से सतर्क रहें। इसके अलावा आईईएलए,भुली योजना,बीमा और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में विभिन्न गांवों से तीन सामुदायिक स्तर के संघों से जुड़े 30 स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। इनके साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण उद्यम परियोजना से जुड़े कार्मिकों ने भी सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं की बेहतर समझ उपलब्ध कराना,उन्हें वित्तीय रूप से जागरूक एवं सशक्त बनाना तथा सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए सक्षम बनाना रहा। कार्यशाला के माध्यम से महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि वित्तीय जानकारी और सही बैंकिंग ज्ञान आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है। यदि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बचत,ऋण,बीमा और सरकारी योजनाओं का समझदारी से उपयोग करें तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं,बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं। इस अवसर पर सीएलएफ पदाधिकारी,स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं,सीएफएल एवं बैंक प्रतिनिधि,एलआईसी प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामोत्थान परियोजना के कार्मिक उपस्थित रहे।