
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गत वर्ष 6 अगस्त को आयी भीषण आपदा ने जनपद पौड़ी गढ़वाल के सैंजी गांव की तस्वीर बदल दी थी। मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की भयावह त्रासदी ने गांव के कई आशियानों को पलभर में मलबे में तब्दील कर दिया। चारों ओर चीख-पुकार,भय और बेबसी का माहौल था। गांव के 16 परिवार बेघर हो गए थे,जिनमें से 7 परिवार ऐसे थे जिनके घरों में एक सुई तक नहीं बच पायी थी। वर्षों की मेहनत और सपने देखते ही देखते धराशायी हो गए थे। लेकिन आज लगभग नौ माह बाद, उसी सैंजी गांव में फिर से उम्मीदों के दीप जल उठे हैं। जहां कभी मलबा और मायूसी पसरी थी,वहां अब नए घरों के साथ लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटती दिखाई दे रही है। यह बदलाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संवेदनशील नेतृत्व,त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासन की मानवीय कार्यशैली का परिणाम माना जा रहा है। आपदा की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं सैंजी गांव पहुंचे थे। उन्होंने प्रभावित परिवारों के बीच बैठकर उनका दुख-दर्द साझा किया और भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन समय में हर पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का यह संवेदनशील व्यवहार आपदा से टूट चुके लोगों के लिए किसी संबल से कम नहीं था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून पहुंचकर आपदा प्रभावितों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। इससे प्रभावित परिवारों को यह भरोसा मिला कि केंद्र और राज्य सरकार उनकी पीड़ा को गंभीरता से समझ रही है। मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों पर सरकार और जिला प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्रवाई शुरू की। आपदा प्रभावित सभी 16 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त जिन 7 परिवारों की भूमि पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी,उन्हें एसडीआरएफ के विस्थापन मद से मकान निर्माण हेतु 4.25 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। सरकार की इस पहल का परिणाम यह रहा कि आज प्रभावित परिवारों के नए घर तैयार हो चुके हैं और वे पुनः सम्मानपूर्वक अपने जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। गांव में फिर से रौनक लौट रही है और लोगों के भीतर भविष्य को लेकर नया विश्वास जागृत हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन ने पुनर्वास प्रक्रिया को केवल सरकारी कार्यवाही तक सीमित न रखते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ाया। प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास,भोजन,चिकित्सा सुविधा तथा अन्य आवश्यक मदद समय पर उपलब्ध कराई गई। प्रशासन लगातार प्रभावितों के संपर्क में रहा ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आपदा प्रभावित नीलम सिंह भण्डारी ने भावुक होकर बताया कि आपदा के बाद उनका परिवार लंबे समय तक अस्पताल और अस्थायी आश्रय में रहने को मजबूर था। उन्हें लगने लगा था कि शायद अब जीवन दोबारा सामान्य नहीं हो पाएगा, लेकिन सरकार की सहायता और प्रशासन के सहयोग से उनका नया घर तैयार हो गया है। उन्होंने कहा कि यह नया आशियाना उनके लिए केवल मकान नहीं,बल्कि जीवन को फिर से शुरू करने की नई उम्मीद है। वहीं बबीता देवी ने बताया कि आपदा के दौरान उनका पूरा सामान नष्ट हो गया था और उन्हें विश्वास नहीं था कि इतनी जल्दी उनका घर दोबारा बन पाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उनका परिवार फिर से सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और बच्चों के चेहरे पर भी खुशी लौट आयी है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप आपदा प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास के लिए संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य किया गया। सरकार की प्राथमिकता रही कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए,ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन पुनः शुरू कर सकें। सैंजी गांव आज केवल पुनर्वास की कहानी नहीं,बल्कि संवेदनशील शासन,मजबूत इच्छाशक्ति और मानवता की मिसाल बनकर सामने आया है। यह उदाहरण बताता है कि जब सरकार संवेदनशीलता के साथ कार्य करती है,तो आपदा से बिखरे सपनों को भी फिर से बसाया जा सकता है।