महंगाई के बीच सम्मानजनक वेतन और रोजगार की मांग तेज-गम्मा सिंह ने सरकार से उठाई कर्मचारियों और बेरोजगारों की आवाज

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी और पलायन के बीच रोजगार एवं कर्मचारियों के सम्मानजनक वेतन का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। अब अंबेडकर समाज संगठन

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी और पलायन के बीच रोजगार एवं कर्मचारियों के सम्मानजनक वेतन का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। अब अंबेडकर समाज संगठन के अध्यक्ष गम्मा सिंह ने राज्य सरकार से मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों,सहायिकाओं,आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तथा उपनल कर्मियों को वर्तमान समय की महंगाई के अनुरूप न्यूनतम 20 हजार से 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाए,ताकि वे भी सम्मानपूर्वक अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। गम्मा सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित ज्ञापन में कहा कि प्रदेश के हजारों कर्मचारी वर्षों से बेहद कम मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई,शिक्षा,स्वास्थ्य,आवास तथा दैनिक जरूरतों का खर्च तेजी से बढ़ा है,लेकिन इन कर्मचारियों के वेतन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। ऐसे में अल्प वेतन पर जीवन-यापन करना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य,पोषण तथा महिला सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। वहीं आउटसोर्सिंग और उपनल कर्मचारी विभिन्न सरकारी विभागों की रीढ़ बनकर वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं,लेकिन उन्हें उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन नहीं मिल पा रहा है। गम्मा सिंह ने कहा कि सरकार यदि इन कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार से 30 हजार रुपये प्रतिमाह करती है तो इससे हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी,कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गुणवत्ता आएगी। उन्होंने राज्य सरकार से रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उद्योग,पर्यटन,कृषि आधारित स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार के स्थायी साधन विकसित किए जाएं। यदि युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार मिलेगा तो पलायन पर प्रभावी रोक लग सकेगी। गम्मा सिंह ने यह भी कहा कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों पर नियमित भर्ती नहीं होने से बेरोजगार युवा निराश हैं। सरकार को शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू कर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए तथा रिक्त पदों को समाप्त करने के बजाय उन्हें भरने की दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने पूर्व की भांति सेवायोजन कार्यालयों के माध्यम से पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को मजबूत करने की भी मांग की,ताकि आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को बिना किसी आर्थिक बोझ के समान अवसर मिल सकें। गम्मा सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य के विकास की आधारशिला तभी मजबूत होगी जब बेरोजगार युवाओं को रोजगार,श्रमिकों को सम्मानजनक वेतन और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार जनहित से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के लाखों परिवारों को राहत प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सशक्त कर्मचारी,आत्मनिर्भर युवा और रोजगारयुक्त उत्तराखंड ही विकसित उत्तराखंड की सबसे मजबूत पहचान बन सकता है।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...