मां मंगला देवी मंदिर से गूंजा हरित संकल्प-समलौण अभियान ने हरेला से पहले जगाई पर्यावरण चेतना

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं,धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण की संस्कृति को साकार करते हुए विकासखंड कल्जीखाल के ग्राम नलई स्थित प्राचीन मां मंगला देवी मंदिर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं,धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण की संस्कृति को साकार करते हुए विकासखंड कल्जीखाल के ग्राम नलई स्थित प्राचीन मां मंगला देवी मंदिर परिसर में हरेला पर्व के पूर्व समलोंण आंदोलन के तहत भव्य वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। धार्मिक आस्था,सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण के अद्भुत संगम से सजे इस अभियान में ग्रामीणों ने प्रकृति के प्रति अपने दायित्व का संकल्प दोहराते हुए दर्जनों पौधों का रोपण किया तथा मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छ एवं हरित वातावरण का संदेश दिया। समलोंण आंदोलन संस्था के जिला संयोजक पवन पटवाल के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में कचनार,देवदार,आंवला सहित अनेक छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। पौधारोपण के साथ ही मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया,जिससे धार्मिक स्थलों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के चर्चित पर्यावरण गीत डाली लगवाला के माध्यम से उपस्थित लोगों को प्रकृति संरक्षण,स्वच्छता और वृक्षों के महत्व का संदेश दिया गया। गीत की मधुर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को पर्यावरण चेतना से सराबोर कर दिया और ग्रामीणों को अधिकाधिक पौधारोपण के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर पवन पटवाल ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की शोभा नहीं,बल्कि मानव जीवन के आधार हैं। पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व वृक्षों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि आज अंधाधुंध विकास,वनों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है,जिसके दुष्परिणाम जलवायु परिवर्तन,जल संकट और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है कि वह अपने जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर जन्मदिन,विवाह,धार्मिक अनुष्ठान,पुण्यतिथि एवं अन्य सामाजिक आयोजनों पर पौधारोपण को संस्कार के रूप में अपनाए। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों में वृक्षों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना विकसित होगी,तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण मिल सकेगा। उन्होंने ग्रामीणों से वनों को आग से बचाने,पौधों की नियमित देखभाल करने तथा समलोंण आंदोलन को जन-जन का अभियान बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान नलई ने समलोंण आंदोलन की इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी प्रयास बताया। वहीं सरिता नेगी एवं नलई विकास समिति के अध्यक्ष कोमल नेगी ने लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया,ताकि पौधों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और वे भविष्य में विशाल वृक्ष का रूप लेकर पर्यावरण को समृद्ध बना सकें। इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य मानवेंद्र बिष्ट,रतन बिष्ट,भास्कर थपलियाल,ईश्वर पटवाल,दीपा देवी,देवेश्वरी देवी,सोनिया उनियाल,ऋषभ,आदित्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण,युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि हरेला पर्व की भावना के अनुरूप अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएंगे,उनकी नियमित देखभाल की जाएगी तथा पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब धार्मिक आस्था,सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण एक साथ जुड़ते हैं,तब प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी केवल अभियान नहीं,बल्कि जनसंस्कार बन जाती है।

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