राज्य सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट से मिली मंजूरी-ग्रामीण अर्थव्यवस्था व स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026 को मंजूरी दे ही है। इस नीति का उद्देश प्रदेश

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026 को मंजूरी दे ही है। इस नीति का उद्देश प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास,स्थानीय उद्यमिता,रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित यह नीति गांव-गांव में सहकारिता को बढ़ावा देने को व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों को मुताबिक राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की मूल भावना सहकार से समृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश की सहकारिता नीति को तैयार किया गया है। जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों की छोटी एवं सीमांत जोतें,बिखरी ग्रामीण आबादी,पलायन,सीमित औद्योगिकीकरण,जलवायु परिवर्तन तथा दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। नई नीति में सहकारिता को केवल ऋण वितरण की व्यवस्था तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं। उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। इनमें सहकारिता की बुनियाद को मजबूत करना,सहकारी संस्थाओं की जीवंतता,भविष्य के लिए तैयारी,समावेशिता एवं पहुंच का विस्तार,नए एवं उभरते क्षेत्रों में प्रवेश,सहकारिता से युवा पीढ़ी को जोड़़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण प्रमुख हैं। नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय,आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि उद्यान,डेयरी,बागवानी,मत्स्य,भंडारण,कोल्ड-चेन,प्राथमिक प्रसंस्करण,कृषि यंत्र किराया,बीमा,पेंशन,डिजिटल बैंकिंग और अन्य ग्रामीण सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके अलावा हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण,मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़़ने पर भी विशेष जोर रहेगा। नीति में महिला और युवा भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जनपद में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने,स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण एवं बाजार से जोड़़ने तथा युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप,इंटर्नशिप,कौशल विकास,उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा तय की गई है। सहकारिता को युवाओं के लिए सम्मानजनक एवं आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए प्रशिक्षण,शोध,प्रबंधन एवं आधुनिक कौशल विकास तंत्र को मजबूत किया जाएगा। नई नीति सहकारिता को पारंपरिक कृषि और ऋण व्यवस्था से आगे ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके अंतर्गत सहकारी पर्यटन,होम-स्टे नेटवर्क,इको-टूरिज्म,एग्रो-टूरिज्म,आयुष,सौर ऊर्जा,प्राकृतिक एवं जैविक खेती,कार्बन क्रेडिट,वन आधारित उत्पाद,औषधीय एवं सुगंधित पौधे,स्वास्थ्य सेवाएं,ड्रोन,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,स्मार्ट लॉजिस्टिक्स,हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहकारी मॉडल विकसित किए जाएंगे। राज्य-विशिष्ट पहल के रूप में सहकार टैक्सी के माध्यम से सदस्य-स्वामित्व वाली परिवहन सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की दिशा भी नीति में शामिल की गई है। बाइब्रेंट विपेज प्रोग्राम को सहकारिता से जोड़ते हुए सीमांत एवं पर्वतीय गांवों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और उद्यम विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गांव में उत्पादित वस्तुओं का स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। हब एंड स्पोक माॅडल के माध्यम से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सहकारी सेवाओं की पहुंच को भी मजबूत किया जाएगा। नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कार्यप्रणाली,रियल-टाइम लेखांकन,डिजिटल बैंकिंग,नियमित वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट,पेशेवर प्रबंधन और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला सहकारी बैंकों में क्लाउड सीबीएस,पैक्स व बैंक एकीकरण तथा मोबाइल-फर्स्ट डिजिटल बैंकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 का क्रियान्वयन वर्ष 2026 से 2036 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहला चरण के तहत वर्ष 2026-27 तक विधिक सुधार,एमआईएस प्रशिक्षण,संस्थागत ढांचे और डिजिटलीकरण पर फोकस रहेगा। द्वितीय चरण में वर्ष 2028-31 तक ग्राम पंचायत स्तर तक सहकारी सेवाओं का विस्तार,मूल्य-श्रृंखला आधारित क्लस्टर तथा बहुउद्देशीय सहकारी सेवा नेटवर्क का विकास किया जायेगा। तीसरे चरण में वर्ष 2032-36 तक उत्तराखण्ड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना तथा औषधीय उत्पाद,हस्तशिल्प,दुग्ध,मत्स्य एवं अन्य हिमालयी उत्पादों की राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है। नीति के माध्यम से राज्य में सशक्त एमपैक्स नेटवर्क,डिजिटल सहकारी इकोसिस्टम,महिला एवं युवा नेतृत्व में वृद्धि,सीमांत क्षेत्रों में रोजगार सृजन,पलायन में कमी और सहकारिता आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य,जिला एवं विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था के साथ डिजिटल डैशबोर्ड आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित की जाएगी। राज्य कैबिनेट ने उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति 2026 को मंजूरी दे दी है। हमारा लक्ष्य केवल सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं,बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम,आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है। सहकार से समृद्धि के मंत्र के साथ उत्तराखण्ड अपने विशिष्ट हिमालयी सहकारिता मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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