राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रतिष्ठित परियोजना से गौरवान्वित हुआ गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय,रंगमंच को मिली नई राष्ट्रीय पहचान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने रंगमंच एवं सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। विश्वविद्यालय के लोक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने रंगमंच एवं सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र को देश के सर्वोच्च रंगमंचीय प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,नई दिल्ली की प्रतिष्ठित प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला परियोजना प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय,बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड और विशेष रूप से गढ़वाल अंचल के लिए गौरव और सम्मान का विषय मानी जा रही है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय देश का सर्वोच्च रंगमंचीय प्रशिक्षण संस्थान होने के साथ-साथ एशिया के अग्रणी सरकारी नाट्य संस्थानों में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र पर विश्वास व्यक्त करते हुए यह परियोजना प्रदान किया जाना इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय में रंगकर्म,लोक-संस्कृति और नाट्य शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। इस प्रतिष्ठित परियोजना के अंतर्गत लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में लगभग 30 से 40 दिवसीय प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय,संवाद-अभिव्यक्ति,चरित्र निर्माण,वाचिक एवं आंगिक अभिनय,रंगभाषा,मंच-सज्जा,प्रकाश व्यवस्था,संगीत संयोजन,शारीरिक अभिव्यक्ति,दृश्य विन्यास तथा रंगमंचीय प्रस्तुति की व्यावहारिक बारीकियों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा,जिससे विद्यार्थियों का व्यक्तित्व और कलात्मक दक्षता दोनों विकसित होंगे। कार्यशाला में प्रख्यात मराठी साहित्यकार महेश एलकुंचवार की चर्चित रंगकृति विरासत का मंचन तैयार किया जाएगा। यह नाटक भारतीय परिवार व्यवस्था,बदलते सामाजिक परिवेश,पीढ़ियों के वैचारिक टकराव,पारिवारिक मूल्यों,मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। इस नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों को अभिनय कला के साथ-साथ भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक संवेदनाओं को समझने का भी अवसर मिलेगा। इस कार्यशाला का निर्देशन लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार करेंगे,जो स्वयं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हैं तथा पिछले लगभग 19 वर्षों से रंगमंच,अभिनय प्रशिक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके निर्देशन में अनेक सफल नाट्य प्रस्तुतियां मंचित हो चुकी हैं। वहीं कार्यशाला में सह-निर्देशक के रूप में केंद्र के पूर्व छात्र अंकित भट्ट प्रतिभागियों को अभिनय,मंच अनुशासन और प्रस्तुति की तकनीकी बारीकियों का प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। कार्यशाला का शुभारंभ हो चुका है। इसमें लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के रंगमंच विषय के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के छात्र-छात्राएं भी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को केवल अभिनय ही नहीं,बल्कि आत्मविश्वास,नेतृत्व क्षमता,टीम भावना,संवाद कौशल,रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विविध आयामों से भी परिचित कराया जा रहा है। कार्यशाला के समापन अवसर पर 24,25 अथवा 26 अगस्त को लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सभागार में नाटक विरासत का सार्वजनिक मंचन किया जाएगा। यह प्रस्तुति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा स्वीकृत परियोजना का मुख्य आकर्षण होगी,जिसमें दर्शकों को उच्च स्तरीय रंगमंचीय प्रस्तुति देखने का अवसर मिलेगा। लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक एवं कार्यशाला निर्देशक महेंद्र सिंह पवार ने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से यह प्रतिष्ठित परियोजना प्राप्त होना विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान की बात है। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की रंगमंचीय कार्यप्रणाली,अभिनय कौशल और प्रस्तुति की व्यावहारिक बारीकियों को निकट से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय गतिविधियों को नई ऊर्जा,नई दिशा और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र का उद्देश्य केवल कलाकार तैयार करना नहीं,बल्कि भारतीय लोक परंपराओं,सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों से जुड़े संवेदनशील एवं रचनात्मक व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की इस परियोजना से विद्यार्थियों को अपने हुनर को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा तथा उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक-संस्कृति और रंगमंचीय परंपरा को भी नई पहचान मिलेगी। यह उपलब्धि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उत्कृष्टता का सशक्त प्रमाण है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रतिष्ठित परियोजना मिलने से विश्वविद्यालय ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वह शिक्षा के साथ-साथ कला,संस्कृति और रंगमंच के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।

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