रेडियो पर गूंजेगी गांव की आवाज-श्रीनगर की महिलाएं सुनाएंगी अपनी कहानी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। बदलते समय के साथ अब गांव की महिलाएं भी अपनी बात मजबूती से रखने लगी हैं और इस बार उनकी आवाज रेडियो के माध्यम से दूर-दूर तक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। बदलते समय के साथ अब गांव की महिलाएं भी अपनी बात मजबूती से रखने लगी हैं और इस बार उनकी आवाज रेडियो के माध्यम से दूर-दूर तक गूंजने जा रही है। आगामी 29 मार्च रविवार को श्रीनगर नगर निगम क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं गांव की बात कार्यक्रम में भाग लेकर अपने अनुभव विचार और प्रतिभा को रेडियो पर साझा करेंगी। इस विशेष पहल के तहत स्वीत,उफल्डा,चौरास,बागवान और सिरणी जैसे क्षेत्रों की महिलाएं एक मंच पर एकत्रित होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल महिलाओं को अभिव्यक्ति का मंच देना है,बल्कि उनके जीवन से जुड़े अनुभव-खासतौर पर खेती-बाड़ी,सामाजिक सरोकार और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक समाज तक पहुंचाना भी है। कार्यक्रम के संयोजक एवं माध्यमिक वर्ग बालिका महिला क्रिकेट प्रतियोगिता के संस्थापक देवेन्द्र गौड़ ने बताया कि इस आयोजन को लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक रेडियो कार्यक्रम नहीं,बल्कि ग्रामीण महिलाओं की सोच,संघर्ष और सफलता की सशक्त अभिव्यक्ति का मंच है। यहां महिलाएं अपने अनुभवों के साथ-साथ गीत,संगीत,भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत भी प्रस्तुत करेंगी। कार्यक्रम के तहत प्रतिभागी महिलाएं सुबह 7 बजे श्रीनगर से प्रस्थान करेंगी। यात्रा के दौरान वे ग्राम फलासी में मां चण्डिका के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगी,जिसके बाद केदार रेडियो एवं चंद्रापुरी में मंदाकिनी की आवाज कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देंगी। यह यात्रा आस्था,अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव का अनूठा संगम साबित होगी। इस आयोजन में उफल्डा से शोभा नेगी,स्वीत से रेखा तिवाड़ी,सिरणी से चंद्रकला बंगवाल,नैथाणा से रेखा कपरवाण तथा श्रीनगर से गीता नेगी और रजनी जुगरान सहित कई महिलाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। सभी प्रतिभागियों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह और उमंग देखने को मिल रही है। स्पष्ट है कि यह पहल न केवल महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,बल्कि गांव की आवाज को मुख्यधारा से जोड़ने का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है। आने वाले समय में ऐसे प्रयास ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखते हैं।

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