विशेष लोक अदालत में त्वरित न्याय की मिसाल-श्रीनगर बाह्य न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम के पांच मामलों का कराया सफल निस्तारण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। न्याय को सरल,सुलभ,त्वरित एवं कम खर्चीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार को बाह्य न्यायालय श्रीनगर में विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। न्याय को सरल,सुलभ,त्वरित एवं कम खर्चीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार को बाह्य न्यायालय श्रीनगर में विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देश तथा जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के आदेशानुसार आयोजित इस विशेष लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम,1881 (धारा 138) से संबंधित मामलों का आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में निस्तारण किया गया। विशेष लोक अदालत की पीठ की अध्यक्षता सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु.अलका ने की,जबकि पीठ के सदस्य के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप मैठाणी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोक अदालत के माध्यम से परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित पांच मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया,जिससे संबंधित पक्षों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली और समय व धन दोनों की बचत हुई। इस अवसर पर न्यायालय ने कहा कि लोक अदालतें न्याय व्यवस्था का एक प्रभावी एवं जनहितकारी माध्यम हैं,जहां आपसी सहमति और संवाद के आधार पर विवादों का त्वरित समाधान संभव होता है। विशेष रूप से चेक अनादरण (चेक बाउंस) से जुड़े मामलों में लोक अदालतों के माध्यम से समझौता होने से न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है तथा पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध भी बने रहते हैं। विशेष लोक अदालत के दौरान अधिवक्ताओं एवं न्यायालय कर्मियों का सक्रिय सहयोग देखने को मिला। इस अवसर पर बार एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष प्रमेश चन्द्र जोशी,संरक्षक अनूप पांथरी,महासचिव ब्रह्मानंद,पूर्व महासचिव विकास पंत,पूर्व उपाध्यक्ष विवेक जोशी,देवी प्रसाद खरे,कोषाध्यक्ष सुबोध भट्ट,विकास कठैत,आर.पी.थपलियाल,राखी राय,महेंद्र पाल सिंह रावत,भूपेंद्र पुंडीर,सुरेंद्र सिंह रौथाण,सुधीर उनियाल,चंद्रभानु तिवारी,बलवीर सिंह रौतेला,गौरव उपाध्याय,कविता मेवाड़,कुलदीप दानू,प्रेरणा काला तथा लक्ष्मीकांत सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे। न्यायालय की ओर से रीडर निर्मल सिंह,ज्योतिष घिल्डियाल,शिवानी बिष्ट,सोहन सिंह तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आनंद प्रसाद भारती सहित न्यायालय के अन्य कर्मचारियों ने भी विशेष लोक अदालत के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष लोक अदालतें न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी,मानवीय और सुलभ बनाने का सशक्त माध्यम बन रही हैं। ऐसे आयोजनों से न केवल लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव होता है,बल्कि आमजन का न्यायपालिका के प्रति विश्वास भी और अधिक मजबूत होता है।

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