

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव,कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव और डिजिटल युग की नई चुनौतियों एवं संभावनाओं पर केंद्रित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीडीटीएआई-2026 (शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन,कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकियां) का सफल एवं गरिमामय समापन हो गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन ने विश्वभर के शिक्षाविदों,शोधकर्ताओं,वैज्ञानिकों,शिक्षक-प्रशिक्षकों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान कर शिक्षा के भविष्य को लेकर सार्थक वैश्विक संवाद स्थापित किया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय,सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता प्रभाग तथा छाबी विश्व फाउंडेशन के तत्वावधान में किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल परिवर्तन और नवीन तकनीकों के प्रभावी एवं उत्तरदायी उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना था। सम्मेलन संयोजक प्रोफेसर अनिल नौटियाल ने बताया कि सम्मेलन को देश और विदेश से अभूतपूर्व प्रतिसाद प्राप्त हुआ। कुल 408 शोध-सार प्राप्त हुए,जिनमें से विशेषज्ञों की कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद 149 शोधकर्ताओं को पूर्ण शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया। इसके उपरांत अंतिम शैक्षणिक मूल्यांकन और विशेषज्ञ समीक्षा प्रक्रिया के पश्चात 65 उत्कृष्ट शोध-पत्रों का चयन प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया। चयनित शोध-पत्रों में भारत सहित विभिन्न देशों के विद्वानों ने शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े नवीन विचार,अनुसंधान और नवाचार प्रस्तुत किए। आयोजन सचिव डॉ.अतुल बमराड़ा ने बताया कि सम्मेलन के दौरान चार अंतरराष्ट्रीय मुख्य व्याख्यान सत्र आयोजित किए गए,जिनमें विश्वस्तरीय शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल शिक्षण पद्धति,साइबर सुरक्षा,समावेशी शिक्षा,भारतीय ज्ञान परंपरा,शिक्षक शिक्षा,शैक्षिक नवाचार और भविष्य उन्मुख शिक्षण प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। इन व्याख्यानों ने प्रतिभागियों को बदलते वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य को समझने और नए अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अधिगम,जनरेटिव एआई,डिजिटल शिक्षण पद्धति,शैक्षिक नेतृत्व,अधिगम विश्लेषण,साइबर सुरक्षा,समावेशी शिक्षा,मानसिक स्वास्थ्य,खेल आधारित अधिगम,शिक्षक व्यावसायिक विकास तथा भविष्य के लिए तैयार अधिगम तंत्र जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच हुए विचार-विमर्श ने शिक्षा में तकनीक के जिम्मेदार,नैतिक और प्रभावी उपयोग को लेकर नई सोच और दिशा प्रदान की। छाबी विश्व फाउंडेशन के निदेशक डॉ.विश्वनाथ गर्गोटे ने इसे संस्था की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह पहला अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मेलन था,जिसने वैश्विक स्तर पर शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नए सहयोग,अनुसंधान और नवाचार के द्वार खोले हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने विभिन्न देशों के विद्वानों और संस्थानों को जोड़कर ज्ञान साझेदारी की एक मजबूत नींव तैयार की है। फाउंडेशन के सचिव एवं सह-आयोजन सचिव पार्था रॉय ने सम्मेलन की सफलता के लिए सभी वक्ताओं,प्रतिभागियों,समीक्षकों,तकनीकी विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन न केवल ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं,बल्कि वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करते हैं। समापन अवसर पर आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत शोध निष्कर्ष,विचार-विमर्श और शैक्षणिक संवाद शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्तरदायी उपयोग की दिशा में दूरगामी प्रभाव छोड़ेंगे। साथ ही यह सम्मेलन भविष्य की शैक्षणिक नीतियों,अनुसंधान परियोजनाओं और तकनीक आधारित शिक्षण मॉडल के विकास में महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगा। आईसीडीटीएआई-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की शिक्षा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल परिवर्तन के समन्वित उपयोग से ही अधिक समावेशी,प्रभावी और वैश्विक बनेगी।