
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी,जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। वार्षिक स्थानांतरण सत्र-2026 के अंतर्गत विद्यालयी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपते हुए शासन ने महत्वपूर्ण पदों पर नई तैनातियां की हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से विभागीय कार्यप्रणाली में तेजी आएगी,प्रशासनिक समन्वय और अधिक मजबूत होगा तथा विद्यालयी शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार को नई गति मिलेगी। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ अधिकारी विनोद प्रसाद सेमल्टी को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया है। शिक्षा प्रशासन का लंबा अनुभव रखने वाले सेमल्टी अब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों,योजनाओं और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनसे विभाग की कार्यप्रणाली में और अधिक दक्षता तथा नवाचार की अपेक्षा की जा रही है। इसी क्रम में के.एस.रावत को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ प्रभारी निदेशक,प्रारम्भिक शिक्षा तथा अपर परियोजना निदेशक,समग्र शिक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रारम्भिक शिक्षा और समग्र शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की कमान मिलने से विद्यालयी शिक्षा के आधारभूत ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। शासन ने विनोद कुमार ढौंडियाल को उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद,रामनगर का प्रभारी सचिव नियुक्त किया है। बोर्ड परीक्षाओं के संचालन,परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा शैक्षणिक गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा गोविन्द राम जायसवाल को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) के साथ प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी,देहरादून का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। वहीं रणजीत सिंह नेगी को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक),नैनीताल नियुक्त करते हुए प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी,नैनीताल तथा लोक सेवा अधिकरण,नैनीताल के नोडल अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। शिक्षा विभाग के जानकारों का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने से विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी,निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी तथा विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी। प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित होने से शिक्षकों,विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी इसका सकारात्मक लाभ मिलने की संभावना है। शासन का मानना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ वरिष्ठ अधिकारी अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देंगे। इससे शिक्षा के क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं का प्रभावी संचालन होगा,नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य को गति मिलेगी।