शोध,नवाचार और विकसित भारत के संकल्प पर साथ आए राजकीय व निजी विश्वविद्यालय

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश सरकार ने

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब राज्य के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालय शोध,नवाचार,अकादमिक उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। इसके साथ ही विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। यह निर्णय प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित सभागार में आयोजित निजी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। बैठक में राज्य के दो दर्जन से अधिक निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता,शोध,नवाचार,रोजगारपरक शिक्षा एवं सामाजिक सरोकारों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारोन्मुख,शोध आधारित और नवाचार से जोड़ना है। इसी सोच के अनुरूप अब प्रदेश के राजकीय और निजी विश्वविद्यालय मिलकर शोध परियोजनाओं,नवाचार गतिविधियों तथा अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देंगे,जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय विकसित भारत-2047 विषय पर अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े दो-दो राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ-साथ विषय विशेषज्ञ,पद्मश्री सम्मानित व्यक्तित्व,राज्यपाल,मुख्यमंत्री,केंद्रीय एवं राज्य मंत्री,सांसद तथा अन्य विशिष्ट अतिथि अपने विचार साझा करेंगे,जिससे युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका समझने का अवसर मिलेगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि निजी विश्वविद्यालय अब केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करेंगे। इससे प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को अपनी खेल क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिलेगा। सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालय अपने आसपास के पांच-पांच गांवों को गोद लेकर उन्हें आदर्श गांव के रूप में विकसित करने में सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विश्वविद्यालय एक आंगनबाड़ी केंद्र अथवा राजकीय प्राथमिक विद्यालय को भी गोद लेकर वहां मूलभूत सुविधाओं के विकास,स्वच्छता,नशामुक्ति और जन-जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान देगा। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने,विद्यार्थियों के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का विस्तार करने तथा स्थानीय भाषा,लोक संस्कृति,परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को पाठ्यक्रमों में समुचित स्थान देने पर भी विशेष बल दिया गया। उच्च शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निजी विश्वविद्यालयों की समस्याओं एवं सुझावों के त्वरित समाधान के लिए शासन स्तर पर एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाए। इस पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि सीधे अपने सुझाव और समस्याएं दर्ज कर सकेंगे,जिससे अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय की बचत होगी और समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव बी.वी.आर.सी.पुरुषोत्तम,अपर सचिव मनुज गोयल सहित उत्तरांचल विश्वविद्यालय,क्वांटम विश्वविद्यालय,हरिद्वार विश्वविद्यालय,ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय,पतंजलि विश्वविद्यालय,श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय,स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय,यूपीईएस विश्वविद्यालय,आईएमएस विश्वविद्यालय,डीआईटी विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के दो दर्जन से अधिक निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों ने सहभागिता कर उच्च शिक्षा के विकास को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में लिए गए निर्णयों को उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है,जिससे शोध,नवाचार,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक सहभागिता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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